धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Sunday, December 6, 2015

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का मंदिर सांस्कृतिक भारत के पुनरुत्थान के लिये आवश्यक आवश्यकता ram temple

श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, हमारी संस्कृति के आदर्श हैं. समूचे भारत में उनके चिन्ह हैं. वह समाज के सभी वर्गों को जोड़ते हैं. राजकुमार होते हुए भी 14 वर्ष तक समाज के सामान्य पुरुष की तरह रहना सहर्ष स्वीकार करते हैं. वह शबरी के जूठे बेर खाकर सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं. रावण को हराने में अकेले सक्षम होते हुए भी स्थानीय नर-वानर-भालुओं का सहयोग लेते हैं. वह रावण के भाई विभीषण को सहर्ष शरण देते हैं. स्वर्णमयी लंका को जीतने के बाद वहाँ से कुछ नहीं लेते और राज्य विभीषण को सौंपकर अपनी जन्मभूमि वापस लौट आते हैं.


ऐसे यशस्वी राजा का स्मृति मंदिर उनके जन्म स्थान श्री अयोध्या जी में था. बिना वह प्रतीक चिन्ह ढ़्हाये भारत की संस्कृति को मिटाना असंभव था. अत: सन 1528 ईसवी में विदेशी आक्रमणकारी बाबर के वंशजो ने भव्य राममंदिर तोड़कर उसके स्थान पर एक ढ़ाचा बना दिया. राष्ट्र के जागे स्वाभिमान के कारण 6 दिसंबर 1992 को वह ढ़ाचा गिरा दिया गया.


कायदे से तो यह बहुत सामान्य सी अराजनैतिक बात होनी चाहिये थी. कारण कि इस देश में रहने वाले सभी पंथो-वर्गो के पूर्वज राम हैं, बाबर नहीं. उनका मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहाँ बनेगा.


वर्तमान में रामलला तम्बू में विराजमान हैं. भारत सहित समूचे विश्व के सत्य सनातन धर्म के अनुयायियों के लिये यह मंदिर श्रद्धा का केन्द्र है. यदि यह मंदिर भव्य बनता है, तो एक बड़े भूभाग की आर्थिक संरचना भी बदल जायेगी. सोचिये कि प्रतिदिन कितने लोग वहाँ दर्शन करने को आयेंगे. उन्हे कितने लीटर दूध चाहिये, कितनी सब्जियाँ, पुष्प अथवा अन्य वस्तुये चाहिये होंगी. यह वहाँ के किसान ही तो देंगे. वहाँ स्थित धर्मशालायें, होटल, भोजनालय, परिवहन सहित अन्य सेवाओं की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिये लाखों युवक-युवतियों को रोज़गार भी मिलेगा.

किन्तु यह सब रुका हुआ है कारण कि इस बड़े सामाजिक मुद्दे को उतना ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया है. श्रद्देय अशोक सिंहल जी जिन्होने राष्ट्र के जागे स्वाभिमान का नेतृ्त्व किया था, अब हमारे बीच नहीं हैं. प्रश्न यह है कि पुन: उतना ही बड़ा जनज्वार कौन उठायेगा, कौन कोटि कोटि जनता को श्रीराम जन्मभूमि के भव्य मंदिर का सामाजिक एवं आर्थिक महत्व समाझायेगा.

यह भी अखण्ड सत्य हैं कि राममंदिर बनना तय है, लेकिन इसका यश किसके भाग्य में लिखा है यह प्रश्न अनुत्तरित है.........


अवधेश पाण्डेय
सी-185, सेक्टर 37, ग्रेटर नोएडा.
9958092091