धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, June 13, 2015

किसानों के सपने kisaan dream

चली है शीतल मंद बयार, जलधि लेकर आये उपहार.
धरा मन प्यासा था तरसे, स्वर्ण बन अब बूँदे बरसे.
हरित हो उठे सूखते धान, लौटती खेतों में मुस्कान.
हुए हैं इंद्र देव अपने, किसानों के जागे सपने.

चलो! अब लौटें अपने गाम, करेंगे योजन से कुछ काम.
चुनेंगे मिलकर सब एक नाम, गाँव की होगी वह पहचान.
मिलाते हुए हाथ से हाथ, चलेंगे मिलकर सब एक साथ.
भोर से होगा श्रम अविराम, सुफल होगा इसका परिणाम.

कृषि का होगा वहाँ विकास, पशुधन होगा सबके पास.
इसमें फूलवाड़ी का योग, पलायित कु-पोषण के रोग.
फसल जब खेतों में दमके, किसानों के चेहरे चमके.
दूध की नदियाँ बहें अनन्त, प्रसन्न हों ग्रामों के भगवन्त.

सहज जब गाँवों का जीवन, सुखी तब हर शरीर और मन.
सुमति से रहें सभी परिवार, मनाते हँसी-खुशी त्योहार.
धरती भी उगले सोना, राष्ट्र का समृद्ध हर कोना.
नहीं जब शहरों की चाहत, बनेगा तभी स्वच्छ भारत.
 
अवधेश पाण्डेय
सी-185, ग्रेटर नोएडा.
9958092091.

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