धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Tuesday, February 17, 2015

शिव भाव महिमा (shiv emotional intelligence)

कब करना मुझको विषपान, कब करना किसका संहार,
कब बनना है बाबा भोला, कब करना किसका उद्धार,

कब विचरूँ कैलाश पर जाकर, कब कर दूँ डमरू का नाद,
तांडव कब करना है शिवजी, कब चुप बैंठूँ आँखें साध....
 
तुम गृहस्थ हो और विरक्त हो, हे शिव! तेरे रूप अनेक,
तुम्हरी महिमा कैसे जानें, प्रश्न यही है मन में एक,

चन्द्रमौलि कब दर्शन दोगे, सहज बता दो मुझको आज,
मन को इतना कैसे साधें, तुमसे पूछूँगा यह राज.
 
अवधेश पाण्डेय.
सी-185, सेक्टर 37, ग्रेटर नोएडा.

2 comments:

रविकर said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार को
दर्शन करने के लिए-; चर्चा मंच 1893
पर भी है ।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!

Shanti Garg said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति