धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Thursday, January 1, 2015

ईसवी सन परिवर्तन का विरोध करना एवं इसे नववर्ष कहना दोनों अनुचित और अव्यवहारिक (20150101).

ईसवी सन 2014 चला गया और नया ईसवी सन 2015 आ गया, इस सन का महत्व दैनिक जीवन में है और रहेगा भी. इसको अंतराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया है. इसका विरोध करने वाले भी इसे अच्छी तरह जानते हैं और दैनिक जीवन में इसका प्रयोग करते हैं. अत: सिर्फ 1 जनवरी के दिन इसका सांकेतिक विरोध अति उत्साह के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है. ऐसे लोग सांस्कृतिक राष्ट्र गौरव के नाम पर ईसवी सन का विरोध करते हैं.

मेरी अपनी राय में यह सन परिवर्तन का यह क्षण है, साथ ही ईसाइयों एवं अंग्रेजियत की मानसिकता वाले भारतीयों के लिये मौज़ मस्ती का सप्ताह. भारतीय सभ्यता में इसे सिर्फ सन परिवर्तन की दृष्टि से देखा जाना चाहिये न कि नववर्ष की दृष्टि से. अत: स्नेही स्वजनों को भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों में नववर्ष की बजाय, ईसवी सन् या वर्ष 2015 आदि का उल्लेख होना चाहिये. हमारी संस्कृति में नववर्ष जब आता है तब प्रकृ्ति अपने आप संदेश देने लगती है, पेडों पर नये पत्ते लगना, ऋतु परिवर्तन, फसलें पकना, जीव जंतुओं के अंदर नई उर्ज़ा आना आदि घटनायें इसके स्पष्ट लक्षण हैं. सर्वे भवंतु सुखिन: वाली भारतीय संस्कृति को आधार मानकर विचारें कि यह कैसा नववर्ष है जब प्रकृ्ति का एक बड़ा जीवन वर्ग (सरीसृप वर्ग) निर्जीव होकर सोता रहता है. समय का चक्र प्रकृति के अनुसार चलता है अत: ईसवी सन परिवर्तन को नववर्ष न मानने का प्रबल कारण है. ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि इस अर्थ प्रधान युग में समूचा विश्व अपना वाणिज्य वर्ष अप्रैल से शुरु करता है.

लेख का आशय यह है कि भारतीय संस्कृति के नाम पर ईसवी सन का विरोध भी अनुचित है और इसके बदलने पर मौजमस्ती की अति भी. अत: हम ईसवी सन का स्वागत आतिथ्य भाव से करें एवं जैसे अतिथि भी हमारे परिवार का अंग होता है, वैसे इसे सम्मान से स्वीकारें. किन्तु यह भी ध्यान रखें कि हम अपना सबकुछ अतिथि को ही न सौंप दें. भारतीय पंचाग चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सुबह सूर्य की किरणों के साथ प्रारंभ होता है. यही हमारा नववर्ष है. जो प्रकृति के अनूकूल है एवं कालचक्र परिवर्तन का एहसास कराता है.

अंत में ईसवी सन 2015 की हार्दिक शुभकामनायें, इसबार अंग्रेज़ियत छोड़ें और भारतीयता अपनायें. 

!! भारत माता की जय !!

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