धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Friday, April 11, 2014

मतदान की लहर (Votingwave)

गौतमबुद्ध नगर लोकसभा के मध्यम वर्ग बाहुल्य डेल्टा प्रथम मतदान केन्द्र पर अपने संगठन के साथियों के साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. सुबह से ही मतदाताओं की लम्बी कतार और किसी कीमत पर वोट डालने का ऐसा जज्बा मैने पहले कभी नहीं देखा. निश्चित ही लोगों में मतदान का यह जूनून केन्द्र सरकार के कुशासन के कारण था. लोग अच्छे परिवर्तन के लिये वोट डाल रहे थे. युवक-युवतियों और विशेषकर महिलाओं में अपना मत देने के लिये विशेष जूनून था. कई महिलायें अकेले या गुट में मतदान करने के लिये आयीं तो कई महिलायें अपने परिवार को लगभग धकेलती हुई मतदान केन्द्र पर जाती दिखीं.

एक महिला मतदाता सूची में अपने पति का नाम तलाशते हुए बोलीं कि इतना मुश्किल से इनको लेकर आयी, अब मतदाता सूची में इनका नाम ही नहीं है तो एक महिला अपने युवा बेटे को मतदान के लिये प्रेरित करती दिखीं. एक मोहतरमा तो स्वयं वोट डालकर अपने पति की पर्ची लेकर गयीं और उन्हे लगभग धकेलती हुई मतदान केन्द्र पर ले आयीं. महिलाओं का उत्साह देखते हुए मेरा आकलन है कि इस चुनाव का मुख्य मुद्दा महँगाई ही है.

शाम चार बजे जब हमने मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण किया और मतदान न करने वालों से संपर्क करने का प्रयास किया तो पाया कि शेष बचे लोग या तो उस समय किन्ही कारणों से शहर में नहीं थे या उनका मतदान सूची में नाम तो था किन्तु वे उस पते पर रहते नहीं थे. अत: वास्तविकता यह है मतदान का प्रतिशत कहने को भले ही 65 हो, पर वास्तव में यह शत प्रतिशत था.

उत्तर प्रदेश के चुनावों में अक्सर प्रत्याशी की जाति देखकर मतदान किया है किन्तु इस बार एक जाति  विशेष के कुछ प्रतिशत वोटों के अपवाद को छोड़कर, बाकी मतदाताओं ने प्रत्याशी की जाति न देखकर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिये वोट दिया.

रात जब घर वापस आया तो मेरी बिटिया ने मुझसे हाथ उलट कर दिखाने के लिये कहा, वह मेरी अँगुलियों की ओर देखती हुई बोली कि आपने ........ जी को वोट नहीं दिया क्या, बाबा जी (मेरे पड़ोसी) तो वोट देकर आ गये. मैने उसे बताया कि मुझे तो अपने गाँव जाकर 7 मई को वोट देना है. उसकी यह जागरुकता देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया.

कहते हैं कि वोट ओट में होता है लेकिन कल हुए मतदान को देखकर लगा कि जीत चाहे जिस भी दल या प्रत्याशी की हो यह तो मतगणना के दिन पता चलेगा, किन्तु लोकतंत्र तो कल ही जीत गया.

लोकतंत्र के महापर्व की हार्दिक शुभकामनायें