धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Tuesday, January 1, 2013

ईसवी सन परिवर्तन को नववर्ष कहना अनुचित एवं अव्यवहारिक(2012-13)

ईसवी सन 2012 चला गया और नया ईसवी सन 2013 आ गया, ईसवी सन का महत्व दैनिक जीवन में है और रहेगा भी, इसको सभी ने स्वीकार कर लिया है, इसका विरोध करने वाले भी इसे अच्छी तरह जानते हैं, ऐसे लोग सांस्कृतिक राष्ट्र गौरव के कारण ईसवी सन का विरोध करते हैं, अन्यथा इसके विरोध का अन्य कोई औचित्य नहीं.
 
मेरी अपनी राय में यह सन परिवर्तन का यह क्षण है, साथ ही ईसाइयों के लिये मौज़ मस्ती का सप्ताह. भारतीय सभ्यता में इसे सिर्फ सन परिवर्तन की दृष्टि से देखा जाना चाहिये और अगर आवश्यक है तो स्नेही स्वजनों को भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों में नववर्ष की बजाय, ईसवी सन् का अवश्य उल्लेख होना चाहिये.
 
यह नववर्ष कदापि नहीं है, नववर्ष जब आता है तब प्रकृ्ति अपने आप संदेश देने लगती है, पेडों पर नये पत्ते लगना, ऋतु परिवर्तन, फसलें पकना, जीव जंतुओं के अंदर नई उर्ज़ा आना आदि घटनायें आदि इसके स्पष्ट लक्षण हैं. जरा सोचिये सर्वे भवंतु सुखिन: वाली भारतीय संस्कृति को आधार मानें और सोचें कि यह कैसा नववर्ष है जब प्रकृ्ति का एक बड़ा जीवन वर्ग (सरीसृप वर्ग) निर्जीव होकर सोता रहता हो. अगर यह नववर्ष होता तो अर्थ प्रधान इस युग में समूचा विश्व अपना वाणिज्य वर्ष अप्रैल से न शुरु करता.
 
भारतीय नववर्ष का महत्व जानने के लिये पहले इसके प्रति श्रद्धाभाव रख अध्ययन करना होगा और तब आपको प्रकृति स्वयं जनवरी और मार्च-अप्रैल का फर्क अनुभव कराने लगेगी. मेरे लेख का आशय 2013 का विरोध करना कदापि नहीं, मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि ईसवी सन का सम्मान आतिथ्य भाव से करें, किन्तु नववर्ष गर्व के साथ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनायें.
 
ईसवी सन 2012 में जो हमें महान आत्मायें हमें छोड़ कर चली गयीं, उन्हे सादर हार्दिक विनम्र श्रद्धांजलि.
 
!! भारत माता की जय !!

2 comments:

रविकर said...

मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।
आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े आत्म-विश्वास ।

बढ़े आत्म-विश्वास, रास सन तेरह आये ।
शुभ शुभ हो हर घड़ी, जिन्दगी नित मुस्काये ।

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो ।
सुख-शान्ति सौहार्द, मंगलमय नव वर्ष हो ।।

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।