धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Wednesday, January 11, 2012

मूर्ति या लाचार गरीब: कडकडाती ठण्ड में किसे ढकना जरूरी (murti garib)

उत्तर प्रदेश में चुनाव का मौसम है, चुनाव आयोग ने नोएडा और लखनऊ में मायावती सरकार द्वारा बनवायी गयी मूर्तियों को ढकने का आदेश दे दिया है. अल्टीमेटम भी दे दिया है, आदेश पर कार्यवाही भी की जा रही है, हर समाचार चैनल इसे प्रमुख मुद्दा मानकर प्रमुखता से दिखा रहे हैं, यह भी बता रहें है कि कहाँ किस रंग के कपडे से हाथी की मूर्ति ढकी जा रही है. माया मैडम मस्त हैं, उनके हाथी का मुफ्त में प्रचार-प्रसार हो रहा है. बसपा ने इसे हाथी पर जुल्म बता कर जनता के बीच जाने का फैसला कर लिया है, यानि वोटों का जुगाड और पक्का हो गया है.

अब एक दूसरा पहलू देखें, न जाने कितने गरीब इस देश में भूखे नंगे पडे हैं, उन्हे ढकने के लिये माननीय उच्चतम न्यायालय भी रैनबसेरे बनाने का आदेश दे चुका है, लेकिन आदेश पर कार्यवाही का कोई अल्टीमेटम नहीं, जब तक प्रशासन आदेश पर अमल करना चाहता है तब तक सर्दी खत्म और सब भूल जाते हैं. इतने बडे देश में चन्द मौतें मायने नहीं रखती. इस कडकडाती ठण्ड में गरीब को ढकना इतना जरूरी नहीं, जितना मूर्तियाँ बनाना या उन्हे ढकना. इसलिये समाचार चैनल के लिये भी यह कोई बडी खबर नहीं. भूखे नंगे व्यक्ति टीवी चैनलों को पैसे भी नहीं दे सकते, इसलिये मीडिया को उनसे कोई सरोकार नहीं.

भारतीय राजनीतिक तंत्र एक लूटतंत्र है, जिसमें विभिन्न दलों के लूटेरे आपके बीच जा कर लूटने का लाइसेंस माँगते हैं. सम्हल कर रहें, कोई हाथ लेकर तो कोई फूल लेकर आयेगा, कोई हाथी पर आयेगा तो कोई साईकिल पर. आप कितना भी लडिये मरिये, चुनाव बाद हाथ-फूल-हाथी-साईकिल सब इकट्ठे होकर आपके खजाने पर डकैती डालना जारी रखेंगे. उन्हे आप‌की चिन्ता नहीं क्योंकि आप अपनी दाल-रोटी से उपर नहीं उठ पाते, इसलिये सत्ता की मोटी मलाई खाना उनका हक बनता है.

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