धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Monday, December 26, 2011

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव (UP Assembly polls)

1) माया मैडम सत्ता खोने के भय से परेशान होकर अपने भ्रष्टाचारी मंत्रियों को बर्खास्त करती जा रहीं हैं, उन्हे अपना खुद का भ्रष्टाचार अभी तक नहीं दिख रहा है. चुनाव पूर्व की गयी यह कवायद अब जनता को रास नहीं आने वाली. बिना किसी पूर्व तैयारी के प्रदेश को बाँटने का उनका फार्मुला भी बेअसर रहा है.

2) भाजपा के पास कोई करिश्माई नेतृ्त्व नहीं है किन्तु बाबा-अन्ना इफेक्ट से पार्टी की सीटें बढ सकती हैं. पार्टी के लिये सत्ता की राह बहुत कठिन है, चुनाव सर पर हैं लेकिन पार्टी की तैयारी को देखते हुए लगता है जैसे चुनाव उन पर थोप दिये गयें हैं. विधान सभा चुनावों मे पार्टी की हार कई बडे नेताओं का राजनीतिक भविष्य खतरे में डाल देगी, लेकिन फिर भी अभी तक पार्टी एकजुट नहीं हो पायी है.

3) मोदी की विराट इमेज पर भाजपा के अति महात्वाकांक्षी नेताओं ने खुद ही झाडू मार दिया है. पार्टी अगर अपना भला चाहती है तो मोदी को उत्तर प्रदेश चुनाव में उतारना ही होगा. वैसे अटल जी के जन्मदिवस पर समाचार पत्रों में अटल गाथा प्रकाशित कर पार्टी ने एक सराहनीय कदम उठाया है.

4) रालोद के अजीत सिंह ने हैण्डपंप कांग्रेस के हाथ को पकडाकर केंद्र में मंत्री पद झटक लिया है, चुनाव बाद मुलायम और उनकी सपा की साईकिल भी काँग्रेस के हाथ में ही होगी. कांग्रेस और सपा में अपनी सीटें अधिक करने की लडाई चल रही है, ताकि चुनाव बाद अपना मुख्यमंत्री बनाया जा सके. काँग्रेस ने कई सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं जो सपा को हराने का कार्य करेंगे.

5) उत्तर प्रदेश में अपना दल, पीस पार्टी और बुंदेल खण्ड काँग्रेस के गठबन्धन की ताकत को भी नकारा नहीं जा सकता. पूर्वांचल की कई सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी मजबूत स्थिति में हैं और विधानसभा में पहुंच भी सकते हैं. अन्य पार्टियों के कई प्रत्याशियों को यह गठबंधन विधानसभा में पहुचने से रोक सकता है.

2 comments:

Nitesh said...

अपना दल की स्थिति पूर्वाँचल मेँ बहुत ही मजबूत है ऊपर से पीस पार्टी और बुंदेलखंड कांग्रेस के साथ गठबंधन करके अपना दल ने पूर्वाँचल की सभी सीटेँ अपने जेब मेँ डाल ली हैँ।जनता इस बार इन्ही गठबंधन वाली सरकार को उत्तर प्रदेश मेँ लायेगी।सपा बसपा भाजपा और कांग्रेस से जनता उब चुकी है।

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

पता नहीं क्या होगा?
भाजपा को कब अक्ल आएगी कि वह मोदी के नाम को भुनाने की पहल करे| खिचडी तो मोदी जी पका ही चुके हैं, इनसे तो खाते भी नहीं बनती| पहले बिहार में नितीश के सामने घुटने टेके अब यू पी में अपने अहम् के आगे|