धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Wednesday, August 10, 2011

लोकशाही के लिये अन्ना का सहयोग आवश्यक (Support Anna to save democracy)



जनलोकपाल के लिये अन्ना का आंदोलन चरम पर है, लेकिन अभी भी आंदोलन की आलोचना
करने वाला बुद्धिजीवी वर्ग सक्रिय है. यह बुद्धिजीवी लोगों में संशय की भावना पैदा कर रहे हैं और अपने समर्थन में विभिन्न तर्क दे रहे हैं. कुछ लोग आंदोलन को फिक्स बता रहे हैं, तो कुछ लोग कहते हैं कि आंदोलन अति महत्वाकांक्षी लोगों की देन है.  लेकिन परिस्थितियाँ इससे भिन्न है, अत: इन कथित बुद्दिजीवियों की सलाह पर गौर करने की बजाय इनके अतीत में झाँकने की जरूरत है कि इन्होने टीवी पर भाषण आदि देने की बजाय देश के लिये किया क्या है.

देशवासियों खासकर युवाओं से अपील है कि वे आंदोलन के समर्थन में आगे आयें जिससे देश का भविष्य सुरक्षित हो सके.  आज प्रत्येक देशवासी को देश के अपने जनलोकपाल का समर्थन करना चाहिये. अन्ना जिस लोकपाल की माँग कर रहे हैं वह भ्रष्टाचार को रोकने में सक्षम होगा या नहीं यह विचार करने के बजाय पहली माँग एक सशक्त लोकपाल ही होनी चाहिये. अगर सरकार झुकी तो जनतंत्र की जीत होगी और जनता में यह विश्वास पैदा होगा कि अगर वह सडक पर आ जाये तो कुछ भी मुश्किल नहीं. साथ ही सरकारों में भी डर पैदा होगा कि अगर जनता भडक गयी तो फिर उनकी खैर नहीं.

यह आंदोलन सफल हुआ तो इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे. हम अक्सर देखते हैं कि हमारे अपने चुने नेता चुनाव जीतने के बाद जनता को भूल जाते हैं, जब जनता देश की तानाशाह सरकार को झुका सकती है, तो एक विधायक, सांसद या अन्य जनप्रतिनिधि के विरुद्ध आंदोलन कर उससे भी अपनी माँगें मनवायी जा सकती हैं. यह आंदोलन उन निराश लोगों मे अन्याय के विरुद्ध फिर से चेतना पैदा कर सकता है, जो यह कहते हैं कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता.

जेपी की समग्र क्रांति को हुए बहुत वर्ष बीत चुके, इसी आंदोलन ने काँग्रेस की तानाशाही खत्म कर देश में राजनीतिक चेतना जगायी और आमलोगों ने राजनीति में रुचि लेनी शुरु की, परिणाम स्वरूप देश में अन्य राजनीतिक विचारधाराओं का जन्म हुआ और विकास का मुद्दा धीरे धीरे हावी हो गया. जनलोकपाल के लिये गये इस आंदोलन के परिणाम भी कुछ ऐसे ही होंगे. आज देश के राजनीतिक नेतृत्व में बडे परिवर्तन की आवश्यकता है, अत: लोकतंत्र में लोकशाही के लिये खुद भी खडे हों और समाज को भी इस आंदोलन से जोडें, क्योंकि असली लोकतंत्र वह है, जहाँ जनता की मर्जी चले सरकारों की नहीं.....
आईये मिलकर नारा लगाते हैं:-- अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं.
चलते चलते: आईएसी के सहयोगियों से यह विनती है कि वे अग्निवेश जैसे जनता की भावना से खिलवाड करने वाले और अलगाववादियों का समर्थन करने वाले लोगों से दूरी बना कर चलें.

भारत वंदेमातरम.......

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