धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, August 20, 2011

जनलोकपाल तो चाहिये ही काला धन भी वापस लाओ (Janlokpal and black money)

अन्ना हजारे का समर्थन और काँग्रेस का विरोध करना, आज कल यही दिनचर्या है. बीते दिनों बाबा रामदेव के अनशन पर हुए हमले ने लोकतंत्र की जडें हिला दी थी तो अन्ना को अनशन की इजाजत न देने से लेकर उनकी गिरफ्तारी ने देश में लोकतंत्र की बची खुची उम्मीद भी समाप्त कर दी थी. लगातार हो रहे भ्रष्टाचार, महगाँई, तुष्टिकरण और कुशासन से तंग जनता का विश्वास खो चुकी सरकार ने जब इसके लिये जिम्मेदार लोगों को बचाना शुरु किया और जनता की आवाज बने बाबा रामदेव, अन्ना हजारे जैसे लोगों को दबाना शुरु किया तो लोगों ने कहा अब बस और उनका गुस्सा फूट पडा, और वह सडकों पर आ गयी.

मैने आंदोलन को बहुत करीब से देखा है और इसका हिस्सा भी हूँ. भीड जुटाने के लिये आपको ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पडती. आप बस अकेले खडे खडे भारत माता की जय, वंदेमातरम आदि नारे लगाओ लोग अपने आप आंदोलन से जुडते चले जा रहे हैं. कोई नेता नहीं, समाज अपना नेता खुद है.

आंदोलन से निपटने के लिये काँग्रेस सरकार ने जिस तरह से अन्ना को गिरफ्तार कर तिहाड जेल भेज दिया, वह मेरे गले नहीं उतर रहा. कहीं यह काँग्रेस की रणनीति का हिस्सा तो नहीं, जिसे देश की भोली भाली जनता और खुद विपक्ष भी नहीं समझ पाया. मीडिया के समर्थन से आंदोलन दिन दूना रात चौगुना तरक्की कर रहा है. लेकिन आंदोलन की दिशा बदल गयी है. जरा सोचिये काले धन के मुद्दे में सबसे ज्यादा कौन फँस रहा था. कहीं ऐसा तो नहीं कि आपका अपना जनलोकपाल देशद्रोहियों को बच निकलने का एक सुरक्षित मार्ग तो नहीं दे रहा.

आप जनलोकपाल और काला धन में से किस मुद्दे को प्राथमिकता देंगे. उत्तर यह होगा कि दोनों ही मुद्दे बराबर हैं, एक मुद्दा भारत का भविष्य सुरक्षित करता है तो दूसरा भूतकाल में चोरी गये धन को वापस लाकर एवं दोषियों को सजा दिलाकर भविष्य का निर्माण करता है. लेकिन हालात क्या हैं, जनलोकपाल की वजह से काले धन का मुद्दा खो गया है. बाबा रामदेव ने देश की जनता में जो जागरूकता फैलाई थी, उसका फायदा टीम अन्ना ले गयी. अब टीम अन्ना के जनसमर्थन के बल पर काले धन के मुद्दे को जनता में फिर से स्थापित किया जा सकता है.

समाज के लिये काम करने वाले संगठनों से मेरा यह अनुरोध रहेगा कि वे अन्ना हजारे के जन समर्थन का उपयोग काले धन के मुद्दे को जीवित रखने में करें. क्योकि सरकार के लिये जनलोकपाल बनाना अपेक्षाकृत आसान होगा, लेकिन साथ ही वह काले धन के मुद्दे को दबाना चाहेगी.
अत: आपसे निवेदन है कि आंदोलन में शामिल होकर यह नारा अवश्य लगायें.
गद्दारो तुम होश‌ में आओ, काला धन वापस लाओ. 
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शीला दीक्षित जी को अन्ना का धन्यवाद देना चाहिये, जिसने उनकी सरकार पर आये खतरे तो टाल दिया है.

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