धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Sunday, August 21, 2011

एक सिविल सोसाईटी का काला सच: आँखो देखी (Civil Society: A black truth)

आज ग्रेटर नोएडा में सिविल सोसाईटी के लोगों की एक गोष्ठी हुई, विषय था "Anti Corruption movement in India :its Outcome". टीम अन्ना के श्रीमान मनु सिंह भी थे, बताता चलूँ कि मनु जी अग्निवेश के सहयोगी हैं और जैसा बताया गया, जनलोकपाल आंदोलन के नींव भी हैं.  हम सभी जानते हैं कि अग्निवेश देश के लिये कितने श्रद्धावान हैं तो उनके सहयोगी भी उतने ही पुण्यात्मा होंगे ऐसी मेरी कल्पना है. वहाँ राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि भी थे और समाजसेवी, पत्रकार, उद्यमी एवं वरिष्ठ सेवानिवृत्त नौकरशाह भी.

बुद्धिजीवियों को जब मंच मिल जाता है तो वह खूब बोलते हैं. वे इतना बोले के श्रोताओं एवम कुछ राष्ट्रवादी वक्ताओं को वक्त ही नहीं मिला. भ्रष्टाचार पर हुई चर्चा में काला धन और बाबा रामदेव नदारद रहे. किसी भी वक्ता ने उनका जिक्र तक करना उचित नहीं समझा. सब कुछ प्रायोजित सा चल रहा था, बीच बीच में कुछ श्रोता वक्ताओं को टोकना चाहते थे तो माननीय अध्यक्ष जी ने मना कर दिया और कहा कि उन्हे बोलने का वक्त दिया जायेगा. बाद में कोई प्रश्नोत्तर भी नहीं हुआ, सिविल सोसाईटी के बेचारे श्रोता मनमसोस कर रह गये. जिस तरह कार्यक्रम की गरिमा के नाम पर सबको चुप करा दिया गया वह आम आदमी की आवाज़ को दबाने का प्रयास नहीं तो और क्या था.

कार्यक्रम एक नामी गिरामी कालेज में हो रहा था. वहाँ कुछ कालेज और एक बडे निजी अस्पताल के कर्ता धर्ता भी थे. एक वक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर आप भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते ही हो तो प्रवेश के समय डोनेशन लेना बंद कर दो. अस्पताल के मालिक को भी उन्होने खरी खोटी सुनाई, वास्तव में एक राजनीतिक व्यक्ति द्वारा चलाये जा रहे ग्रेटर नोएडा के उस अस्पताल में आम आदमी अपना इलाज करा ही नहीं सकता.

इन सभी सिविल सोसाईटी के माननीय सदस्यों ने बहस का सार भी निकाला. जिसमें ज्यादा से ज्यादा घिसेपिटे मुद्दे थे. उसको वह टीम अन्ना और सरकार को भेजेंगे. सरकार भी खुश चलो सिविल सोसाईटी ने फिर काले धन के मुद्दे को छोड दिया और टीम अन्ना भी, क्योंकि उनके जनलोकपाल को एक और समर्थन मिल जायेगा.

बडे बडे लोग थे, आई आई एम टापर, आई ए एस, सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक भी थे. लेकिन मूल्य और नैतिकता की कोई बात नहीं हुई, शायद वह यह भूल गये कि अन्ना अपने नैतिक बल के कारण ही इतनी जल्दी लोकप्रिय हो गये.

उस सिविल सोसाईटी में वंदेमातरम बोलना सांप्रदायिकता थी. यह सब सडक पर अच्छा लगता है, सफलता के घोडे पर सवार टीम अन्ना ने भी अपने अनशन स्थल से भारत माता का चित्र हटा लिया है, गाँधी फिर देश से बडे हो गये. मीडिया देर सबेर गाँधीवाद को फिर से स्थापित कर देगा. उसके बाद काँग्रेस के वंशवादी नेता फिर से जनता को वही टोपी पहनाना शुरु कर देंगे.

क्रांतिकारी आंदोलन का स्वप्न लिये बाबा रामदेव फिर सरकार की नीतियों के कारण दंडित किये जा चुके हैं, यानि गाँधी फिर सरदार भगत सिंह पर हावी हो गये. जनता गाँधी टोपी पहने मस्त है बिना सोचे कि जब धारा 302 के होते हुए कत्ल करके लोग बच निकलते हैं तो जनलोकपाल क्या कर पायेगा.

आने वाले भविष्य के बडे सपने जनता फिर से काँग्रेस को सत्ता सौपने की तैयारी कर ले क्योंकि सिविल सोसाईटी का हित काँग्रेस से ही सधता है. भूल जाओ 1948 के जीप घोटाले से लेकर, 2जी, कामनवेल्थ, आदर्श आदि घोटालों को और उनके दोषियों को क्योंकि अब आपका जनलोकपाल आने वाला है, जो उनके लिये कोई खतरा नहीं है.

आपके घर के बाहर एक चौकीदार बैठा रहेगा. अब आराम से बिना ताला लगाये सो जाओ. आपका घर यानि भारत अब सुरक्षित है. जनलोकपाल इसी व्यवस्था परिवर्तन का सपना दिखाता है.
यह और बात है कि राजा, कलमाडी, कनिमोझी और बडे बडे लोग उसी पूराने कानून की वजह से जेल में हैं, जिसको टीम अन्ना हवा में उडाती है.

इस आंदोलन को मैं भी जी रहा हूँ, क्योंकि मुझे अच्छा लग रहा है कि देश की जनता खासकर युवा वर्ग जाग रहा है. जरूरत है उसे फिर से सोने न देने की. नहीं तो फिर से यही लोग देश को लूटते रहेंगे.

कार्यक्रम से बाहर निकलने के बाद मुझे लगा सिविल सोसाईटी से अच्छे वो आटो वाले हैं जिन्होने आज शहर में अन्ना के समर्थन में एक रैली निकाली. क्योंकि वे देशभक्ति की भावना से भरे हुए थे, उनके मन में कोई कालापन नहीं था.

!! भारत माता की जय !!


3 comments:

Tarkeshwar Giri said...

ये तो आपकी अपनी सोच हैं. जरुरी नहीं कि जैसा मैं सोच रहा हूँ ठीक उसी तरह से आप भी सोचे. लेकिन कुछ बाते ऐसी होती हैं, जिससे कि आपस मैं लोगो को मिलने का अवसर प्रदान करती हैं.

C.B.I. ने अब तक पता नहीं कितने नेतावो और मंत्रियों को जेल मैं डाला , लेकिन क्या हुआ. कोर्ट मैं कितने भ्रस्टाचार और घोटाले के केस चल रहे हैं उनका क्या हुआ.

व्यस्था परिवर्तन जरुरी हैं.

अवधेश पाण्डेय said...

@तारकेश्वर जी. आपका आभार. मैं भी व्यवस्था परिवर्तन के चाहता हूँ, लेकिन समाज और देश का इतना बडा असंतोष हमने सिर्फ एक लोकपाल बनाने में खर्च कर दिया. इस शक्ति का उपयोग और बडा भी हो सकता था.
सादर

सुशील बाकलीवाल said...

इस शक्ति का उपयोग और भी बडा हो सकता था.
मेरा तो सोचना यह है कि इस बहाने ही सही देश भर में एकजुटता की यह शक्ति दिखी तो ।