धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, July 23, 2011

आजादी के नायकों की याद में (A tribute to national heroes)


सर्वोच्च बलिदान के बाद आज़ाद का चित्र
भारत के नील गगन पर, चमके हैं कुछ बलिदानी,
हम उन्हे चढाते चलते, अपनी आँखों का पानी.
आज़ादी की खातिर जिसने, अपनी जान गवाँ दी,
वरण मृ्त्यु का असमय करके, देश की शान बढा दी.
गोरे भागे देश से लेकिन, गद्दारों को छोड गये हैं,
उन्हे खदेडो मिलकर बन्धु, थोडे से बस और बचे हैं.
बचन माँगती भारत माता, करना है अब श्रम अविराम,
जब तक बच्चे भूखे सोते, नहीं करोगे तुम विश्राम.
राह दिखाई जिसने सच्ची, भूल न जाना देखो उनको,
आज़ादी का काम अधूरा, पूरा करना है अब हमको.

1 comment:

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

अवधेश भाई बहुत सुन्दर रचना की है आपने...
शहीद चंद्रशेखर आज़ाद को श्रद्धांजलि...