धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Sunday, June 12, 2011

लोकतंत्र के हत्यारे और उनका लूटतंत्र

हमारा देश भारत गणराज्य कहने को तो विश्व का सबसे बडा लोकतंत्र है, लेकिन यहाँ लोकतंत्र की धज्जियाँ रोज़ उडते हुए देखी जा सकती हैं. रामलीला मैदान पर सोये हुए निहत्थे लोगों पर पुलिसिया प्रहार इसकी बानगी भर है. रोज़मर्रा के जीवन में हमें हमारा अधिकार कितना मिलता है, यह सोचनीय है.

जिस देश का प्रधानमंत्री कहता है कि अपनी ही जनता पर लठियाँ चलाने के आलावा उसके पास कोई विकल्प नहीँ था, तो उससे बडा धोखेबाज व्यक्ति कोई दूसरा नहीं. बाबा रामदेव और उनके साथ अनशन पर बैठी जनता ने ऐसा क्या गलत माँगा जिसे पूरा करना प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं थी. सिर्फ अपने आका और सरकार में शामिल भ्रष्ट लोगों एवं खुद को बचाने के लिये लिये गये निर्णय को मजबूरी का नाम देना तर्कसंगत नहीं. बाबा रामदेव ने जब से अनशन का एलान किया तभी से, सरकार और भ्रष्ट लोग उनके खिलाफ आग उगल रहें रहे हैं, बिना यह बताये हुए वह क्या गलत माँग रहे हैं.

जनता को लोकपाल बिल का सपना दिखाने वाले अन्ना हजारे, बाबा को आंदोलन के लिये अनुपयुक्त बता रहे हैं, मुझे तो लगता है कि अन्ना को अपनी टोपी उतार वहीं चले जाना चाहिये जहाँ से वह आये थे. उन्हे अपना खुद का इतिहास देखना चाहिये कि उन्हे इस मुकाम पर पहुचाने में किसकी भूमिका रही. क्या वह अनुभव लेकर पैदा हुए थे. मेरी नज़र में तो ऐसे समाजसेवी को शर्म से डूब मरना चाहिये जो यह सोचता है कि अनुभवहीन व्यक्ति को घर में चुप बैठ जाना चाहिये और उसे आंदोलन या उसका नेतृ्त्व नहीं करना चाहिये. बाबा रामदेव कि माँग में कुछ गलत नहीं, रही नेतृ्त्व की बात तो जैसे सूरज का प्रकाश अपना मार्ग ढूँढ लेता है, वैसे ही इस आंदोलन से निकले हजारों लोग अपना रास्ता खुद ढूँढ लेंगे. जेपी आंदोलन की उपज रहे कई नेता यूपी और बिहार की राजनीति में काँग्रेस को धूल चटा चुके हैं.

सर्वविदित है कि हम उस देश में रहते हैं जहाँ रत्नाकर अपने अच्छे कर्मों की वजह से बाल्मिकि बन कर पूजे जाते हैं तो बाबा रामदेव पर इतने आरोप क्यों? बाबा रामदेव के आलोचक इसका क्या जबाब देंगे, क्या वह इस बात से सहमत नहीं कि काला धन देश में वापस आये?.

बाबा रामदेव के आलोचकों में या तो वे काँग्रेसी हैं जिनका काला धन विदेशों में जमा है या वह नेता जो आने वाले समय में सत्ता प्राप्त कर जनता को लूटने का मंसूबा पाले हुए हैं. भले ही बाबा का अनशन टूट चुका है लेकिन आम जनता के दिल में तो बाबा रामदेव जगह बना चुके हैं और जनता लोकतंत्र के लूटेरों को सबक जरूर सिखायेगी, इसमें कोई संशय नहीं.

7 comments:

Sunil Kumar said...

सरकार की नीयत पे शक तो और पक्का हो जाता है जब वह भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं है | वैसे यह अन्ना कि अपनी सोंच है कोई टिप्पणी नहीं सार्थक पोस्ट आभार

ROHIT said...

कुछ लोगो ने सोनिया गांधी के तलवे चाटना ही अपना धर्म समझ रखा है.
उनके लिये देश का हित कोई मायने नही रखता.
ऐसे लोग ब्लाग जगत मे भी खूब भरे हुये है.
और अपनी कलम घिस घिस कर सोनिया गांधी के प्रति अपनी अगाध भक्ति का प्रदर्शन कर रहे है.
भगवान से प्रार्थना है कि अब ऐसे चापलूसो का प्रोडक्शन बंद कर दे.
ताकि भारत के लोगो को कुछ अच्छे दिन देखने को मिले.

Ankit.....................the real scholar said...

अनशन समाप्त हुआ अब कांग्रेस समाप्त होगी


DR. ANWER JAMAL said...

'करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान' के तहत बाबा के पास अनुभव भी आ ही जाएगा । अस्ल बात मुददे और माददे की है।
मुददा उनका ठीक है और माददा भी उचित खान पान के ज़रिए उनमें बढ़ ही जाएगा।
अब जब कि बाबा ने खाना पीना शुरू कर ही दिया है और एक क्षत्रिय की तरह उन्होंने अंतिम साँस तक लड़ने का ऐलान भी कर दिया है तो हालात का तक़ाज़ा है कि या तो वे पी. टी. ऊषा को अपना कोच बना लें या फिर क्षत्रियों की तरह वीरोचित भोजन ग्रहण करना शुरू कर दें ।
क्या आदमी को बुज़दिल बना देता है लौकी का जूस ?

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

अवधेश भाई...बहुत अच्छा...
जहाँ तक अन्ना हजारे का प्रश्न है तो यही कहूँगा कि शायद अना भी इस सेक्युलर सिविल सोसायटी व लोकपाल ही अंतिम लक्ष्य मान रहे हैं...अन्ना को समझना चाहिए कि २७ फ़रवरी को राम लीला मैदान में हुई बाबा रामदेव की महारैली से ही अन्ना नज़रों में आए थे...मकसद लोकपाल बिल तक सीमित नहीं होना चाहिए...मकसद तो भ्रष्टाचार मुक्त भारत है...

डॉ जमाल साहब...कुतर्कों के अलावा आपके पास शायद और कुछ नहीं है...

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

अवधेश भाई आप मेरे ब्लॉग को Follow कर रहे हैं...मैंने अपने ब्लॉग के लिए Domain खरीद लिया है...पहले ब्लॉग का लिंक pndiwasgaur.blogspot.com था जो अब www.diwasgaur.com हो गया है...अब आपको मेरी नयी पोस्ट का Notification नहीं मिलेगा| यदि आप Notification चाहते हैं तो कृपया मेरे ब्लॉग को Unfollow कर के पुन: Follow करें...
असुविधा के लिए खेद है...
धन्यवाद....

KRANT M.L.Verma said...

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