धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, June 11, 2011

पंडित राम प्रसाद बिस्मिल (Bismil), बाबा रामदेव जी (Baba Ramdev) और देश की बेचारी जनता

11 जून यानि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जी जन्म दिवस, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं. देश के लिये सर्वोच्च बलिदान करने वाले क्रांतिकारियों और वास्तविक आज़ादी का सपना देखने वाले भारत माता के सपूतों मे बिस्मिल का नाम बडे ही आदर के साथ लिया जाता है. मेरे इस लेख का ध्येय यह नहीं कि आप सभी का बिस्मिल के जीवन से परिचय कराया जाये, बस मैं यह चाहता हूँ कि हम उन परिस्थितियों पर गौर करें, जब बिस्मिल जैसे क्रान्तिकारियों को सर्वोच्च बलिदान करना पडा था.

डा. मदन लाल वर्मा जी 'क्रांत'  के प्रयास से
ग्रेटर नोएडा के एक उद्यान का नामकरण
बिस्मिल के नाम पर किया गया.

हमने जवाहर लाल नेहरू का नाम खूब सुना है लेकिन लाला जगत नारायण मुल्ला का नाम बहुत नहीं सुना,  आपको बता दूं कि लाला जगत नारायण नेहरू के साले साहब थे. अब लाला जी और बिस्मिल का संबध यहाँ देखें.

"सन् १९१६ के काँग्रेस अधिवेशन में स्वागताध्यक्ष जगतनारायण 'मुल्ला' के आदेश की धज्जियाँ बिखेरते हुए रामप्रसाद ने जब लोकमान्य बालगंगाधर तिलक की पूरे लखनऊ शहर में शोभायात्रा निकाली तो सभी नवयुवकों का ध्यान उनकी दृढता की ओर गया।"

यह अवश्य बताना चाहुँगा कि अपने समय में लोकमान्य जितने लोकप्रिय थे, उतने गाँधी जी कभी नही रहे.

आप सभी यह भी जानते हैं कि अमर हुतात्माओं बिस्मिल, अशफाक, राजेन्द्र लहिडी और ठाकुर रोशन सिंह को काकोरी कांड में फाँसी की सजा हुई थी, लेकिन सजा दिलाने में योगदान किसका था, आप यह भी देखें.

"इस एतिहासिक मुकदमे में सरकारी खर्चे से हरकरननाथ मिश्र को क्रान्तिकारियों का वकील नियुक्त किया गया जबकि जवाहरलाल नेहरू के साले जगतनारायण 'मुल्ला' को एक सोची समझी रणनीति के अन्तर्गत सरकारी वकील बनाया गया जिन्होंने अपनी ओर से सभी क्रान्तिकारियों को कड़ी से कडी सजा दिलवाने में कोई कसर बाकी न रक्खी। यह वही जगतनारायण थे जिनकी मर्जी के खिलाफ सन् १९१६ में बिस्मिल ने लोकमान्य बालगंगाधर तिलक की भव्य शोभायात्रा पूरे लखनऊ शहर में निकाली थी."

विकिपीडिया में जाकर सब आप सब कुछ देख सकते हैं कि कैसे लाला जगत नारायण ने एक कांग्रेसी बनारसी लाल को वादामाफ गवाह बना कर देश के वीर सपूतों को असमय चिर निद्रा में सुला दिया था. देशवासियों के कल के लिये उन्होने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया था. ज्यादा जानकारी के लिंक देखें.
 http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_'%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2'

वास्तव में अगर देश की स्वतन्त्रता और उसके बाद का सही इतिहास देखें तो नेहरू-गांधी परिवार से घिन आने लगेगी. लेकिन फिर भी यह परिवार भारत भाग्य विधाता बना हुआ है. चाहे बिस्मिल को मिली फाँसी की सजा हो, आज़ाद की अल्फ्रेड पार्क में हुई मौत हो या सरदार भगत सिंह को पथभ्रष्ट युवा कह कर बचाने से इंकार करना हो. प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कहीं न कहीं यही परिवार जुडा नज़र आता है. आज़ादी के बाद डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल बहादुर शास्त्री,  दीन दयाल उपाध्याय आदि नेताओं की मृ्त्यु के प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं.

अब अगर हम विगत 5 जून को हुए रामलीला मैदान काण्ड की बात करें तो हमें कांग्रेस का घिनौना चेहरा फिर सामने दिखता है. अभी भी आपातकाल की यादें लोगों के जेहन में ताज़ा हैं. पिछले एक वर्ष से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी कांग्रेस ने अब जनतंत्र पर ही हमला बोल दिया है. आधी रात को सोते हुए लोगों पर पुलिसिया अत्याचार किसी भी राष्ट्र के लिये कलंक से कम नहीं और दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र में ऐसी घटना घटे तो उस राष्ट्र के शासन तंत्र को डूब मरना चाहिये, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं था. 121 करोड भारतीयों का प्रतिनिधि अगर विकल्पहीन हो कर अपनी ही जनता पर अत्याचार शुरु कर दे तो इसे क्या कहेंगे.

उत्तर प्रदेश के भट्टा पारसोल में विगत दिनों जो कुछ भी हुआ, वह निंदनीय था. लेकिन अब प्रदेश सरकार पर मनगंढत झूठे आरोप लगा खुद को शर्मिन्दा भारतीय कहने वाले राहुल बाबा नदारद हो गये हैं. रामलीला मैदान के अहिंसक आंदोलन को कुचलने के बाद उन्हे भारतीय होने पर गर्व महसूस हो रहा होगा. राज ठाकरे के लोग जब बिहार के युवकों पर मुंबई में अत्याचार कर रहे थे तब भी यही युवराज गर्व महसूस कर रहे थे. यानि खुद करें तो सब कुछ अच्छा और दूसरों के दोष निकालाना कोई इनसे पूछे.

आज देश की जनता को वास्तविकता का एहसास हो रहा है, लेकिन अब भी वह घर में बैठी है. काँग्रेस के विरोध का माहौल है, लेकिन सडक पर कोई नहीं उतर रहा. भाजपा के नेता भी लगभग चुप हैं, मीडिया के सामने आलोचना कर देने से राजनीति नहीं हो सकती. दुर्भाग्य से यह प्रमुख विपक्षी दल ऐसे नेताओं के हाथ में है, जिनका जनता से सीधे संवाद नहीं है. जनता की आवाज बनने की बजाय भाजपा के नेता फोटो सेशन और नाचने गाने में व्यस्त है. जिस मुद्दे पर काँग्रेस को सफाई देनी थी, वहाँ काँग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने भाजपा से पूछ लिया कि राजघाट पर ऐसी कौन सी खुशी की बात थी कि सुषमा और अनुराग ठाकुर नाच गा रहे थे. उसके बाद आयी सुषमा की सफाई भी चौंकाने वाली थी. भाजपा के नितिन गडकरी जी से सिर्फ इतना कहना सही रहेगा कि लोकतंत्र की मृ्त्यु पर देशभक्ति गीत गाकर नाच गाना करने वाले लोग देश का भविष्य नहीं लिख सकते. इन्हे यह समझने की जरूरत है कि 70 करोड से ज्यादा युवाओं वाला देश इन नेताओं को कदापि बर्दाश्त नहीं करेगा और आने वाले समय में इनसे नेतृ्त्व ही छीन लेगा.

अंत में बिस्मिल की देशवासियों के नाम लिखित इन अंतिम पक्तियों को देखें.

लिंक:

मैंने जेल से भागने के अनेकों प्रयत्न किए, किन्तु बाहर से कोई सहायता न मिल सकी यही तो हृदय पर आघात लगता है कि जिस देश में मैने इतना बड़ा क्रान्तिकारी आन्दोलन तथा षड़यन्त्रकारी दल खड़ा किया था, वहां से मुझे प्राणरक्षा के लिये एक रिवाल्वर तक न मिल सका । एक नवयुवक भी सहायता को न आ सका । अन्त में फांसी पा रहा हूं । फांसी पाने का मुझे कोई भी शोक नहीं क्योंकि मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं, कि परमात्मा को यही मंजूर था ।


मगर मैं नवयुवकों से भी नम्र निवेदन करता हूं कि जब तक भारतवासियों को अधिक संख्या सुशिक्षित न हो जाये, जब तक उन्हें कर्तव्य-अकर्तव्य का ज्ञान न जावे, तब तक वे भूल कर भी किसी प्रकार के क्रान्तिकारी षड़यन्त्रों में भाग न लें । यदि देशसेवा की इच्छा हो तो खुले आन्दोलनों द्वारा यथा्शक्ति कार्य करें अन्यथा उनका बलिदान उपयोगी न होगा । दूसरे प्रकार से इस से अधिक देशसेवा हो सकती है, जो अधिक उपयोगी सिद्ध हेागी ।

परिस्थिति अनुकूल न होने से ऐसे आन्दोलनों से अधिकतर परिश्रम व्यर्थ जाता है । जिनकी भलाई के लिये करो , वहीं बुरे-बुरे नाम धरते है, और अन्त में मन ही मन कुढ़-कुढ़ कर प्राण त्यागने पड़ते है ।
देशवासियों से यही अन्तिम विनय है कि जो कुछ करें, सब मिल कर करें, और सब देश की भलाई के लिये करें । इसी से सब का भला होगा, वत्स !

मरते बिस्मिल रोशन लहरी अशफ़ाक अत्याचार से ।
होंगे पैदा सैकड़ों इनके रूधिर की धार से ।।

रामप्रसाद बिस्मिल गोरखपुर डिस्टिक्ट जेल
१५ दिसम्बर १९२७ ई०

क्या 1927 और 2011 में अंतर नहीं?. क्या हम अब भी अशिक्षित हैं? क्या हमें बाबा जी और अन्ना के द्वारा हमारे लिये चलाये गये आंदोलन में चुप बैठना चाहिय?. अगर उत्तर नहीं है तो हे मेरे देशवासियों. उठो, जागो और निकलो सडक पर, लोकतंत्र पर हमले को बर्दाश्त मत करो, वर्ना एक दिन ऐसा आयेगा कि यही नेता अपने स्वार्थ के लिये देश को बेच देंगे.
...... अवधेश

5 comments:

अभिषेक मिश्र said...

बिस्मिल जी की स्मृति का आभार. साथ ही आपने दोनों दलों को एक तराजू पर रखने का भी प्रयास किया है.

अमीत तोमर said...

आप भी पढ़ें बौराया मीडिया, बेईमान कांग्रेस, बेख़ौफ़ बाबा , बाबा जी का साथ दें http://www.bharatyogi.net/2011/06/blog-post_09.html

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

अवधेश भाई आपने इस लेख के द्वारा मन को पूरी तरह टटोल दिया| मेरा मानना है कि मुख्या समस्या कांग्रेस नहीं अपितु जनता का वह वर्ग है जिसे अभी भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा| सब के सब घरों में पड़े हैं| किसी की आत्मा नहीं दुखती इस देश के लिए|
भारत की मुख्या समस्या ये दो पांच प्रतिशत दुर्जन नहीं अपितु वे ९५ प्रतिशत सज्जन हैं जो कि निष्क्रिय हैं|
यही नेता एक दिन अपने स्वार्थ के लिए देश को बेच देंगे| सही कहा...
अभी तो रामलीला मैदान में घुस कर मारा है, एक दिन वह भी आएगा जब घरों में घुस घुस कर मारेंगे...तब इन मुर्ख सज्जनों को अक्ल आएगी...
मन बहुत व्यथित है| सोचा था देश के लिए अपने शरीर पर लाठियां खाई हैं| लौट के जब घर जाएंगे तो देश हमारे साथ खड़ा होगा| परन्तु यहाँ तो हम पर ही उंगलियाँ उठाई जा रही हैं|

Tarkeshwar Giri said...

कांग्रेस ने हमेशा भला चाहा हैं, नेहरु खुद प्रधानमंत्री बनने के चक्कर में भारत के दो तुकडे करवा बैठे, कांग्रेस ने हमेशा देश का बुरा किया हैं. लेकिन अब इसका पतन आ गया हैं. देश कोई कांग्रेस के बाप का नहीं हैं.

दुःख तब होता हैं जब हमारे बीच ही बैठे कुछ ब्लोगेर ( श्रीमती निर्मला कपिल ) जैसे लोग आज भी अपने बच्चो के भविष्य के बारे में नहीं सोचते हैं. अपनी उम्र जी चुके लोग कांग्रेस कि गुलामी में ही जीना पसंद करते हैं.

बाबा रामदेव के द्वारा शुरू किया गया आन्दोलन अब गली -मोहल्लो तक जायेगा.

KRANT M.L.Verma said...

Bawa Ramdev had tried to keep distance with R.S.S. and get the favour of Congress that was why his movement was crushed badly in the night of 4-5th June.
In his speeches he took the name of Poojya Bapu (Gandhi) which created a misunderstanding amongst his followers and they went on unshan alongwith Bawa. It ultimately weakened the agitation. For more feedback the viewers my see my blog krantmlverma.blogspot.com