धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Sunday, February 13, 2011

क्रांति का आह्वान (Call To Revolution!)

लोकतंत्र के नाम पे देखो, वंशवाद फलफूल रहा,
किचन सम्हाले था जो बैठा, बत्ती पाकर झूम रहा.
हिस्सा देकर राजाजी को, सत्ता इनकी चलती है,
चापलूस बन गए योग्य हैं, जनता हर क्षण पिसती है.

भ्रष्टाचारी नोच रहे हैं, सोने की चिडिया के पर,
महगाई से चीख रहे जन, कैसे चलता है अब घर,
न्याय की देवी परेशान है, दुखिया जनता भी हैरान,
देश लूट कर खाय रही है, गोरों की काली सन्तान.

भारत माँ को भूमि समझ कर, बाँटा जिसने देश को,
आज तलक हैं नायक अपने, भूले हम निज गौरव को.
काश्मीर की पुण्य स्थली, दुश्मन के दी हाथ में,
समय आ अब हे! बन्धु, मिल जाओ सब साथ में.

उठो! देश के वीर सपूतों, पौरुष अब तुम दिखलाओ,
सीखो तो कुछ मिस्र देश से, क्रांति नयी फिर कर जाओ.
भारत माता की जय बोलो, लक्ष्य नया हो अब अपना,
वैभव माँ को दे दो वापस, पूरा कर दो हर सपना.

पुण्य भूमि के अपराधी जो, सत्य मार्ग से हटे हुए,
अनुगामी हो संतो के जो, सत्कर्मों पर डटे हुए.
प्राणी मात्र  को सुखी करो तुम, धर्म ध्वजा की लहराओ,
प्रेम समर्पण फिर से फैले, विश्व बन्धु तुम बन जाओ.

Tuesday, February 1, 2011

नव चैतन्य शिविर (Nav Chaitanya Shivir) : एक अविस्मरणीय अनुभव

संघ के स्वयंसेवक के लिए किसी भी शिविर में जाना एक सुखद अनुभव होता है, लेकिन २८/२९/३० जनवरी २०११ को मेरठ में आयोजित नव चैतन्य शिविर में जाना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा. शिविर का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाकर उन्हें देश समाज का एक जिम्मेदार एवं जागरूक नागरिक बनाना था और शिविर से लौटते हुए युवाओं के जोश एवं भारत माता की जय तथा वन्देमातरम जैसे गगन भेदी नारों को देखते हुए लगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरठ प्रान्त द्वारा आयोजित यह शिविर युवाओं में नव चैतन्य जगाने में सफल रहा. शिविर में स्नातक अथवा उसके ऊपर की कक्षाओं में अध्ययनरत लगभग ३००० विद्यार्थियों एवं युवा प्रवक्ताओं ने भाग लिया.
मेरा परम सौभाग्य कि मैं भी शिविर का एक घटक था, विद्यार्थियों को शिविर में जाने के लिए उत्साहित कर उनसे शुल्क लेना भी एक अद्वितीय अनुभव रहा एवं इससे कई सारी बातें सीखने को मिली. जिला प्रचारक श्री नागेन्द्र जी, सह जिला कार्यवाह श्री विवेक जी, जो नव चैतन्य शिविर के कार्यवाह भी रहे तथा डा. विनोद जी जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों से संपर्क करने के नए तरीकों का भी ज्ञान हुआ. कुल मिलाकर आशा निराशा के बीच विद्यार्थियों से मिलकर उनसे मित्रता करना एक सुखद अनुभव रहा.
२ जनवरी २०११ को मेरठ के शताब्दी नगर में भूमिपूजन में आये हुए प्रान्त के विभिन्न जिलों एवं नगरों से आये हुए कार्यकर्ताओं के जोश को देखकर प्रतीत हो गया था कि शिविर अपने आप में अद्वितीय होगा. कई कार्यकर्ता तो उसी दिन अपना बिस्तर लेकर आये थे, जो शिविर के समाप्त होने के बाद तक वही रुके होंगे ऐसा मेरा विश्वास है.
शिविरार्थियों को अपना बिस्तर, भोजन पात्र एवं अन्य जरूरत की वस्तुए स्वयं ले जानी थी क्योंकि शिविर में प्लास्टिक या कागज़ के पात्रों के उपयोग की सख्त मनाही थी एवं शिविर की रचना पूर्ण रूपेण पर्यावरण के अनुकूल थी. २८ जनवरी २०११ को सायं चार बजे शिविर में पहुचना था, लेकिन सब कुछ व्यवस्थित करते हुए देर हो गयी और मैं शिविर में ४ घंटे विलम्ब से रात लगभग ८ बजे पहुचा और उस दिन सायं छः बजे होने वाली जिलाशः बैठक में मै भाग नहीं ले सका. शिविर में विभाग के अनुसार नगर बने हुए थे, हम कारगिल युद्ध के नायक रहे १९ वर्ष की आयु में परमवीर चक्र विजेता (जीवित) योगेन्द्र यादव नगर में थे, शिविर में अन्य विभागों के नगरों के नाम  भी ऐसे ही प्रेरणादायक राष्ट्रनायकों के नाम पर थे. शिविर में नगरों के नाम मेजर संदीप उन्नीकृष्णन नगर (मेरठ महानगर), कुमार आनंद नगर (मेरठ विभाग), तथागत तुलसी नगर (लक्ष्मी नगर विभाग), सचिन तेंदुलकर नगर (गाज़ियाबाद विभाग), संत सीचेवाल नगर (मुरादाबाद विभाग), अधीश कुमार (सहारनपुर विभाग), प्रो. विजय भाटकर  (बिजनौर विभाग) एवं कोठारी बन्धु नगर (व्यवस्था) थे. नगर के बाहर उन राष्ट्र नायकों के बारे में जानकारी भी थी जिससे युवाओं को उन जैसा बनने की प्रेरणा मिले. प्रत्येक नगर में १६ पटकुटियाँ थीं जिसमे शिविरार्थियों के रुकने, व्यवस्था कक्ष, संघ वस्तु भण्डार, प्राथमिक चिकित्सा, संचालन कक्ष आदि थे. प्रत्येक नगर के मध्य में एक सभागार भी था. सभागार के ठीक पीछे की तरफ थोड़ी दूर पर पाकशाला भी थी, जिसमे नगर के लिए भोजन, जलपान आदि के लिए व्यवस्था थी. सबसे पीछे की तरफ स्नानागार और शौचालय थे. जल के अपव्यय को रोकने के लिए टंकिया भी थी तथा ज्ञात हुआ कि स्नान आदि में खर्च जल को पुनः भूमि में अन्दर डालने की व्यवस्था भी की गयी थी. खैर हमने वहां तम्बुओं में अपना बिस्तर लगाया. उसके बाद हमें तत्काल रात्रि भोजन के लिए जाने का आदेश हुआ, भोजन में चूल्हे की गरमागरम रोटी, दाल, सब्जी, तहरी, सलाद व गुड सम्मिलित थे. हम तो वैसे ही भूख से बेहाल थे भोजन करके ही मन तृप्त हुआ.
भोजन के पश्चात हम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मुख्य सभागार में गए. यह शिविर के मध्य में स्थित विशाल पंडाल था जिसमे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन एवं सामूहिक बौद्धिक वर्ग आदि कार्यक्रम होने थे. वहां उपयुक्त स्थानों पर प्रेरणा दायक आदर्श ध्येय वाक्य भी लिखे हुए थे. जब मैं पहुचा तो ज्ञात हुआ कि उद्योगपति श्री रामनिवास जी भारत माता, डा. हेडेगेवार एवं गुरु जी के चित्र पर दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ कर चुके थे. मैं जब पंहुचा तो माननीय क्षेत्र प्रचारक शिवप्रकाश जी का उद्बोधन चल रहा था उन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय विचाराधारा की तरफ अग्रसर होने का संदेश देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक राष्ट्र का जीवन लक्ष्य होता है अतः युवा अपना लक्ष्य तय कर राष्ट्र निर्माण में योगदान करें. जोश से भरे युवा भारत माता की जय, वन्दे मातरम् जैसे गगनभेदी नारों से शिविर को आंदोलित कर रहे थे. युवा कवि गजेन्द्र सोलंकी के कविता पाठ से भी युवाओं में उबाल आ रहा था. कविता पाठ के बाद जैसे ही बाबा सत्यनारायण मौर्य के आने की घोषणा हुई, स्वयंसेवकों ने उनके सम्मान में रास्ते में फूल बिछा दिए. बाबा ने आते ही अपनी ओज पूर्ण गीतों जैसे मेरे देश वासियों..बोलो वंदे मातरम् आदि से शिविर के माहौल को अविस्मरणीय बना दिया. बाबा ने देश भक्ति के गीत गाते हुए स्वामी विवेकानंद, वीर शिवाजी, हनुमान जी आदि के चित्र भी बनाए. बाबा के मेरा रंग से बसन्ती चोला गीत पर जोश में भरे युवाओं ने नृत्य करना प्रारंभ कर दिया. पूरे कार्यक्रम में उन्होंने कभी गीत, कभी कविता तो कभी रामायण की चौपाई सुनाते हुए प्राचीन भारतीय संस्कृति की जानकारी दे युवाओं का मार्ग दर्शन किया. कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भारत माता की आरती गाते हुए उनका चित्र भी बनाया.
रात्रि विश्राम के लिए मुख्य सभागार से वापस अपने नगरों में लौटते शिविरार्थियों के विभिन्न उद्घोषों से शिविर स्थल गूँज रहा था. हमारे टेंट में भी उत्साहित युवा कार्यक्रम एवं शिविर की प्रसंशा कर रहे थे. चर्चाओं का क्रम देर रात तक जारी था. लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गयी.
सुबह साढ़े चार बजे एक युवा उमेश कुमार जी 'उस दिन मेरे गीतों का त्यौहार मनाया जायेगा' गीत के माध्यम से जागरण का कार्य कर रहे थे. पांच बजे की सीटी के साथ ही मैं भी उठा एवं नित्यक्रिया के पश्चात सुबह की चाय पी. सुबह ६:१५ पर नगरशः बैठके थीं. सभी को एकात्मता स्तोत्र का पाठ कराया गया. तत्पश्चात माननीय विभाग प्रचारक अनिल जी (बुलंदशहर विभाग) ने मुझसे बैठक लेने आये श्री विजय शंकर जी संपादक भारतीय धरोहर का परिचय कराने को कहा. पहले विभाग संपर्क प्रमुख श्री हरीश जी, जो योगेन्द्र नगर के प्रमुख भी थे ने मेरा परिचय कराया फिर मैंने विजय शंकर जी एवं विवेक जी (शिविर कार्यवाह) का शिविरार्थियों से परिचय कराया. अपने उद्बोधन में विजय शंकर जी ने भारत के गौरवमयी इतिहास पर प्रकाश डालते हुए प्राचीन भारतीयों द्वारा किये गए आविष्कारों की जानकारी दी.
बैठक के बाद जलपान तथा उसके बाद शिविरार्थी शारीरिक के लिए नगर के संघ स्थान पर गए. उनके जाने के पश्चात् मैंने और जिलाप्रचारक श्री नागेन्द्र जी ने शिविर में अपने जिले गौतमबुद्ध नगर के शिविरार्थियों की सूची तैयार की. व्यवस्था वाले बंधुओं को मिलाकर कुल १५२ लोग अपने जिले से शिविर में आये. फिर शारीरिक खेलों के पश्चात् शिविरार्थियों ने स्नान किया और फिर १२ बजे से दोपहर के भोजन के लिए अपने अपने पात्र लेकर चल पड़े. भोजन के पश्चात अपने पात्र सभी को स्वयं धोने पड़ते थे. चूँकि सभी अपने लिए पात्र लेकर आये थे अतः नगर का माहौल साफ़ सुथरा था. वर्ना इतने बड़े आयोजन के बाद कचरे का ढेर लग जाता और धन की बर्बादी होती सो अलग.
भोजन के पश्चात कुछ शिविरार्थियों से मिलना हुआ. लगभग ६०%  ऐसे थे जो संघ को जानते भी नहीं थे. पहली बार नेकर पहनने का सबका अनुभव भी रोचक था. दोपहर १:४५ बजे से श्रेणीवार बैठक थी. अभियंता, सामान्य स्नातक, प्रबंधन, परास्नातक आदि विभिन्न श्रेणियां थी. मुझे गाजियावाद के विभाग कार्यवाह श्री सुशील जी साथ परास्नातक श्रेणी में बैठक के लिए भेजा. परिचय के पश्चात् सुशील जी ने शिविरार्थियों से देश की समस्याओं और उनके समाधान के बारे में बात की. बैठक के बाद फिर सभी शाखा में गए, वहाँ उन्हें योग-व्यायाम का प्रशिक्षण दिया गया.
शाम को अल्पाहार के पश्चात सभी मुख्य सभागार में बौद्धिक के लिए गए. अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री भागय्या जी ने बताया कि कैसे संघ के धुर विरोधी रहे समग्र क्रांति के प्रणेता श्री जय प्रकाश नारायण संघ के सेवा कार्य से प्रभावित हुए. उन्होंने गांधी जी के वर्धा शिविर में आगमन और उनके शिविर में जाति भेद आदि न होने से प्रभावित होने की चर्चा की. मैंने भागय्या जी का पूरा बौद्धिक लिख डाला. जो कुल ७ पेज का हुआ.
बौद्धिक के पश्चात् रात्रि भोजन एवं फिर मुख्य सभागार में प्रसिद्द क्रिकेटर चेतन चौहान जी ने युवाओं से कहा कि जो करो मन से करो. मेमोरी गुरु श्री सुधांशु सिंहल जी से मेमोरी टिप्स भी मिले. कार्यक्रम के पश्चात् सभी अपने अपने टेंटो में रात्रि विश्राम के लिए चले गए.
अगले दिन प्रातः नित्यक्रिया के पचात चाय और फिर एकात्मता स्त्रोत का पाठ हुआ. नगरशः बैठक के क्रम में बजरंग दल के क्षेत्र संयोजक श्री मनोज जी ने शिविरार्थियों का उत्साहवर्धन किया. उन्होंने शिविरार्थियों से देश की ज्वलंत समस्याओं एवं उनके समाधान के लिए बात की.
बैठक के बाद जलपान और फिर सभी शाखा के लिए मुख्य संघ स्थान गए. वहां सभी शिविरार्थियों ने एक साथ मिलकर समापन कार्यक्रम में होने वाले व्यायाम का अभ्यास किया.
इस बीच मैंने भी मौका देखकर स्नान किया और फिर प्रदर्शनी देखने के लिए गया. यह मुख्य सभागार के ठीक पीछे थी. वहाँ विभिन्न भारतीय राष्ट्रनायकों जैसे नव धनकुबेरों, वैज्ञानिकों, राजनीतिज्ञों, योग गुरु बाबा रामदेव जैसे लोगों के बारे में जानकारी थी. जिससे शिविरार्थियों को उनके जैसा बनने की प्रेरणा मिले. वहाँ संस्कृत भारती द्वारा उपलब्ध पुरातन जानकारियाँ भी रोचक थी. प्रदर्शनी में ही मेरी मुलाकात माननीय क्षेत्र प्रचारक श्री शिव प्रकाश जी से हुई.
प्रदर्शनी देखने के पश्चात मैं भी संघ स्थान गया. वहां मैं विकिर तक रहा और सबके साथ प्रार्थना भी की. प्रार्थना के पश्चात अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डा. दिनेश जी से मिलने का सौभाग्य मिला. वही प्रेरणा नोएडा के संस्थापक श्री आशुतोष जी से भी मिलना हुआ.
संघ स्थान से लौटकर शिविरार्थियों ने स्नान किया. फिर जिलाशः बैठक थी, जिला प्रचारक श्री नागेन्द्र जी ने शिविरार्थियों से वार्ता की और फिर वहां उपस्थित शिविरार्थियों ने शिक्षा दान, रक्तदान, नेत्र दान, देह दान, पर्यावरण रक्षा, जल रक्षा, समय दान जैसे संकल्प लिए. सभी ने संकल्प पत्र भी भरे.
बैठक के पश्चात भोजन के वितरण की जिम्मेदारी हमारे जिले की थी. भोजन वितरण दो पालियों में होना था. हमने पहले से ही जिम्मेदारियां बाँट दी थी, अतः सब कुछ ठीक प्रकार से हो गया.
भोजन के पश्चात हमारे पास एक घण्टे का समय था, मैने समय का सदुपयोग करते हुए विद्यार्थियो को प्रतिभा प्रदर्शन के लिये नगर के मध्य भाग मे स्थित पन्डाल मे बुलाया फ़िर क्या था, विद्यार्थियो मे होड मच गयी और एक एक बाद एक कवि, व्यङ्ग्कार और गायक निकल कर आये. शायद ऐसा कार्यक्रम अन्य नगरो मे भी हुआ हो. कार्यक्रम तो शायद कई घण्टे चलता लेकिन सीटी के साथ ही आदेश पाते ही सभी लोग मुख्य संघ स्थान के लिये चल पडे.
नये एवं पुराने स्वयमसेवको का अनुशासन देखते ही बनता था, मैने स्वयम् सबसे पीछे जाकर वहा मेरठ महानगर के स्वयमसेवको के साथ वहा आये विभिन्न लोगो की बैठने की व्यवस्था मे सहयोग किया.