धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, December 4, 2010

मम्मी का ऑफिस किचन में है.

ऑफिस जाते समय अक्सर बच्चे पूछते हैं, कि पापा! आपका ऑफिस कहाँ हैं? और लोग अपने बच्चे को बड़े प्रेम से जवाब भी देते हैं. ऐसे ही एक दिन मेरी बेटी ने मुझसे पूछा कि पापा! आपका ऑफिस कहाँ है? हमेशा की तरह मैंने से अपनी कंपनी का नाम बता दिया. लेकिन उसने तुरंत अगला सवाल दागा. पापा! मम्मी का ऑफिस कहाँ है? मैंने मजाक में कह दिया किचन में. अब मेरी बेटी हमेशा बोलती है पापा मम्मी का ऑफिस किचन में है.
मेरे द्वारा मजाक में कही यह बात देश के अधिकांशतः परिवारों के लिए सत्य है. मुझे याद कि मेरी माँ का सारा दिन किचन और उसके काम ने निकाल जाता था, श्रीमती जी का भी हाल वही है, सुबह की चाय से लेकर रात में सोते समय दूध के गिलास तक लगातार काम करना. रात में भी जरूरत पड़ने पर पानी, दूध आदि की व्यवस्था करना. घर में कोई सदस्य बीमार हो जाता है तो उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं. बिना साप्ताहिक अवकाश व पगार के लगातार काम करना ही जैसे उनका नसीब हो.
इतना सब कुछ करने के बाद भी उन्हें नॉन वर्किंग कहा जाता है. यह हमारे सभ्य समाज का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है. मनुस्मृति की एक पंक्ति ने जो बात कह दी है, वो बड़े से बड़ा अभियान नहीं कह सकता. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता. इसका मतलब यह कि जहाँ नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं, इसको ऐसे समझने की आवश्यकता है कि जहाँ नारी का सम्मान हो वहां रहने वाले लोग स्वयं देवस्वरुप हो जाते हैं.

4 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

sahi hai.

Udan Tashtari said...

जहाँ नारी का सम्मान हो वहां रहने वाले लोग स्वयं देवस्वरुप हो जाते हैं.

-सत्य वचन!

Ravindra Nath said...

बहुत सुंदर लेख

निर्झर'नीर said...

आजकल अधिकतर नारियां किचन में काम करना पसंद नहीं करती .सामाजिक मूल्यों में अब ज्यादा परिवर्तन आ गया है