धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Wednesday, December 1, 2010

हमाम में सब नंगे

देश में होने वाले नित नए खुलासों ने आम आदमी को विस्मित कर दिया है, कल तो जो आदर्श थे वही आज भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार दिखाई दे रहे हैं, राजनेता, उद्योगपति, पत्रकार, अफसर सब कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, सार्वजनिक रूप से साफ़ सुथरे दिखने वाले लोग भी अपने फायदे के लिए सरकार को इस्तेमाल करते रहें हैं.
वस्तुतः भ्रष्टाचार को बढ़ावा हमेशा ऊपर से मिलता रहता है, ऐसे माहौल में ईमानदार व्यक्ति हतोत्साहित हो जाता है और स्वार्थियों को प्रोत्साहन मिलता रहता है. घटनाक्रम को देखते हुए यह लगता है वास्तव में सरकार चलाने वाले लोग ऐसे हैं जिनके बारे में हम जैसे लोगों को कुछ नहीं पता. देश-प्रदेश में जब किसी पार्टी की सरकार बनती है तो आम कार्यकर्त्ता सोचता है कि मेरी सरकार बन गयी लेकिन हकीकत यह है कि सभी सरकारें कार्पोरेट जगत की दुकान मात्र हैं. विपक्षीदल एवं जनता १०, जनपथ को केन्द्रीय सत्ता का वास्तविक केंद्र मानते रहे लेकिन बिका हुआ मीडिया और सफेदपोश व्यापारी देश को अपने मनमाफिक नचाते रहे और दूसरों को कमजोर एवं खुद को मजबूत बताने वाले नेता भी सत्ता के लिए इनके रहमोकरम पर निर्भर रहे.
संसद में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार की नाक में दम करने वाला विपक्ष अपने नेताओं के भ्रष्टाचार को सहन कर रहा है. बिहार की जनता के मत को कोई भी पार्टी समझ नहीं पा रही. अब समय आ गया है कि सभी दल भ्रष्टाचार के खिलाफ हिंदुस्तान की जनता को सन्देश दे, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत यहाँ से हो सकती है, लेकिन यह तब होगा जब वास्तव में उनके अन्दर देश से भ्रष्टाचार ख़त्म करने की भावना होगी. नितीश कुमार जी ने इस दिशा में सार्थक प्रयास किया है, लेकिन अफसोस कि बिहार में भ्रष्टाचार और कुशासन के विरुद्ध ९०% सफलता का स्वाद चखने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा भी देश की जनता को कोई ठोस सन्देश नहीं दे सकी.
बेशक देश में भ्रष्टाचार की जनक कांग्रेस पार्टी है, लेकिन भारत माता की जय जैसे गगनभेदी नारे लगाने वाले लोग मौका पाते ही जब भारत माता को लूटने लगते हैं तो अपार कष्ट होता है.  आज़ादी के पहले और बाद में असंख्य लोगों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और आगे भी करते रहेंगे, अब देखना यह है उनका त्याग कब तक भ्रष्ट लोगों के लिए सत्ता की सीढी बन देश को कंगाल करता रहेगा. कब तक बाग़ को उजाड़ने के लिए जिम्मेदार लोग बाग़ के माली बने रहेंगे. देश में भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि माननीय उच्चतम न्यायालय की भी अनदेखी की जा रही है. देश की जनता को किसी भी जांच पर विश्वास नहीं रहा. लगता है दोषी छूट जायेंगे या फिर परिणाम आने में इतना विलम्ब होगा की दोषी फैसला सुनने से पहले ही दुनिया से रुखसत हो जाएगा.
जब तक सत्ता का आदर्श गोस्वामी तुलसीदास की यह चौपाई नहीं होगी तब तक जनता ऐसे ही त्रश्त रहेगी इसमे कोई संशय नहीं.
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी.....

चलते चलते
हमारे नेताओं में देश के लिए कितना सम्मान है यह अभी २६/११ को मुंबई में देखने को मिला जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राष्ट्रगान की धुन को अनसुना कर चलते बने.

4 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

अब हमाम संस्‍कृति नहीं है अवधेश भाई
वो समाज संस्‍कृति बन चुकी है। इसलिए
यही कहूंगा कि  इस समाज में सब नंगे हैं और यही सच है, पढ़ेंगे तो जानेंगे बेबस बेकसूर ब्‍लूलाइन बसें

निर्झर'नीर said...

सही कहा अवदेश जी .




लगता है दोषी छूट जायेंगे या फिर परिणाम आने में इतना विलम्ब होगा की दोषी फैसला सुनने से पहले ही दुनिया से रुखसत हो जाएगा.

Deshdaaz said...
This comment has been removed by the author.
Deshdaaz said...

अवधेश जी,

इंटरनेट के माध्यम से हम-तुम जैसे आम आदमी के विचार देश के कोने-कोने से एक-जुट हो रहे है | बस अब दूरी है आचार में एक-जुट होने की और सत्ता के गलियारों से गंद को उखाड फेंकने की | मुझे देश-वासियों और प्रभु पर पूरा भरोसा है | यह दिन भी जल्द और हमारे दुनिया से रुखसत होने से पहले आएगा | जय श्री राम

जय हिंद |