धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, November 13, 2010

भारत माता को गाली बर्दाश्त, लेकिन सोनिया माता पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं

संघ के पूर्व प्रमुख सुदर्शन जी की एक टिप्पणी से बौखलाए कांग्रेसियों ने पूरे देश में तांडव मचा रखा है, सड़क पर घूमते खूंखार काँग्रेसी क्या किसी आतंकी से कम लगते हैं. इससे पहले संघ को आतंकी संगठन तथा आईएसआई का एजेंट जैसी उपमा देने वाले कांग्रेसियों ने कभी अपने गिरेबान में झाँक कर नहीं देखा.

सप्रंग-२ के कार्यकाल पर नज़र डाले तो सरकार ने घोटालों, अलगावाद, आतंकवादियों, नक्सलियों, मंहगाई आदि को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. देश की जनता मंहगाई से त्राहिमाम करती रही लेकिन इन कांग्रेसियों का दिल नहीं पसीजा. भ्रष्टाचार के दलदल में काँग्रेस के एक के बाद एक नेता फंसते गए और हालात यहाँ तक पहुंचे कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के लिए जिस नेता का चयन किया गया, उसके दामन पर भी दाग लगें हैं. 2G घोटाले में दूर संचार मंत्री ए. राजा ने कैग की रिपोर्ट के अनुसार देश को १.७६ लाख करोड़ का चूना लगाया लेकिन किसी काँग्रेसी नेता ने सड़क पर उतरना तो दूर उसका विरोध तक नहीं किया. उलटे सरकार कह रही है कि सब कुछ सामान्य प्रक्रिया के तहत किया गया. कामनवेल्थ खेलों के बहाने देश की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने वाले कांग्रेसी नेताओ का कभी विरोध नहीं हुआ और बेशर्म नेता अभी तक कुर्सी से चिपके हुए हैं. आदर्श सोसाइटी घोटाले में कारगिल के बलिदानियों के परिवार को जो मकान दिए जाने थे और उनपर कितनी बेशर्मी से ये काबिज हो गए यह देश की जनता ने देखा और सुना. भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे काँग्रेसी एक के बाद एक सरकारी संस्थानों को अपने चपेटे में लेते जा रहे हैं, यहाँ तक कि उन्होंने सेना को भी नहीं बख्शा. आलम यह है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने भी जनता का भरोसा खो दिया है.

इतने सारे घोटालो की जांच विपक्ष सयुंक्त संसदीय समिति से कराने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार विपक्ष के नेताओं पर मन गढ़ंत आरोप लगा, अपने पापों पर पर्दा डालने की कोशिश में लगी है. यह सब इसलिए हो रहा है की देश की जनता के सामने घोटालेबाजों का सच न आ सके नहीं तो बहुत से सभ्य चेहरे हमाम में नंगे दिखेंगे.हमारे धृतराष्ट्र रुपी प्रधानमंत्री कुर्सी रूपी कौरवों के मोह में फंस कर सब कुछ देख रहें हैं, इसके लिए देश की जनता उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगी.

२०००० लोगों की मौत के जिम्मेदार एंडरसन को भगाने में तत्कालीन कांग्रेसी तंत्र कैसे लगा था यह भी हमने देखा और सुना लेकिन कितनी कार्यवाही हुई यह चिंता का विषय है. काँग्रेसी नेता अपराध कर रहे हैं, जनता एवं  विपक्ष के विरोध को दबाया जा रहा है. जनतंत्र को कुचलने की घटना नयी नहीं. यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में आपातकाल के रूप में हो चुकी है, लेकिन इसके जिम्मेदार लोगों का महिमामंडन अभी भी जारी है.

आतंक को प्रश्रय देने में भी कांग्रेसियों का जबाब नहीं, काँग्रेस महासचिव दिग्यविजय सिंह, राहुल की प्रस्तावित यात्रा के लिए माहौल बनाने हेतु तीर्थयात्रा करने आजमगढ़ भी गए थे और आतंकियों के परिवार से मिल कर आये थे, काँग्रेस आतंकियों को कितना प्रश्रय देती है यह इस बात से साफ़ है कि दिग्यविजय ने बटला एनकाउन्टर में सर्वोच्च बलिदान करने वाले इ. मोहन चंद शर्मा के बलिदान पर भी सवाल उठा दिए थे.

आतंकियों के मुंबई हमले में बलिदान हुए पुलिसवालों के परिवार से पूछिये कि उनपर क्या गुज़री होगी जब उन्हें पता चला होगा कि देश के लिए मर मिटने वाले पुलिस कर्मियों की रक्षाकवच बुलेटप्रूफ जैकेट नकली थी. क्या कभी कांग्रेसियों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया? उसके जिम्मेदार लोग अभी भी खुले आम घूम रहे होंगे.

हमारे देश के वीर जवान और जनता नक्सलियों के हाथो मारे जा रहें हैं लेकिन इनके कान पर जूँ नहीं रेंगी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे मैनो परिवार के सदस्य नहीं. इतिहास गवाह है कि एक बार १९८४ में कांग्रेसी सड़क पर उतरे थे और तब देश का सिख समाज कांग्रेसियों के उत्पात और दंगो की भेंट चढ़ा था. उस बार भी संकट देश पर नहीं परिवार पर आया था और दंगों में मुख्य भूमिका निभाने वाले लोग मालामाल हो गए. देश में फिर वैसी स्थितियां बनाने की कोशिश की गयी, लेकिन इस बार इन दंगाइयों को पहले इलाहाबाद और फिर लखनऊ में मुहतोड़ जबाब मिला.

कैसी विडम्बना है कि गिलानी और अरुंधती जैसे देशद्रोही दिल्ली में आकर खुलेआम अलगाव का समर्थन करते हैं, तो उमर अब्दुल्ला विधानसभा में कश्मीर के विलय पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं, देशघाती बयानों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर बर्दाश्त करने वाली काँग्रेस का दोहरा चरित्र देखिये, भारत माता को गाली बर्दाश्त है, लेकिन सोनिया माता पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं.

इतिहास में जाएँ तो ऐसे हजारों उदाहरण मिलेंगे जब देश की जनता त्राहिमाम करती रही लेकिन इन कांग्रेसियों का दिल नहीं पसीजा, कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ का नारा देने वाली काँग्रेस का हाथ हमेशा से आम आदमी के गले पर रहा. बचपन में कई सारे नारे सुने थे जिनमे से एक था, खा गयी शक्कर, पी गयी तेल, यह देखो कांग्रेस का खेल. क्या यह नारा आज भी प्रासंगिक नहीं. एक कांग्रेसी की बेशर्म जुबान में कहे तो: मैं एक कांग्रेसी, भ्रष्टाचार मेरा धर्म, तुष्टिकरण मेरी पूजा, चापलूसी मेरा कर्म.

अभी बीते दिनों में दो धरने और प्रदर्शन हुए, एक संघ ने किया, दूसरा कांग्रेस ने. संघ ने अपने ऊपर लगे आरोपों और सरकार द्वारा हिन्दुओं को आतंकवादी घोषित किये जाने के विरोध में देश के सभी जिलों में एक साथ दो घंटे का धरना दिया. कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं आया, संघ के किसी व्यक्ति ने कोई क़ानून नहीं तोडा. धरना देश की अस्मिता, संस्कृति, अखंडता और स्वाभिमान के लिए दिया गया.

वही काँग्रेस का धरना एंटोनिया मैनो (सोनिया) की चापलूसी के लिए हुआ, देश भर में संघ कार्यालयों पर कांग्रेसियों का आतंक दिखा, खुलेआम कानून हाथ में लिया गया, जबकि संघ ने खुद को सुदर्शन जी के बयान से अलग कर लिया था. काँग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि अगर काँग्रेसी कुछ गलत करते हैं तो इसकी जिम्मेदार पार्टी नहीं होगी, उन्होंने यह भी कहा कि टिप्पणी करने वालों को ऐसा जबाब दे कि फिर कोई फिर कुछ बोलने की हिम्मत ना करे. यह कांग्रेसियों को उग्र प्रदर्शन के लिए उकसावा था जिसका पालन कांग्रेसियों ने मैनो परिवार की नज़र में अपना नंबर बढ़ाने के लिए बखूबी किया. देश की समस्याओं पर चुप रहने वाले चापलूस सोनिया पर टिप्पणी के विरोध में सड़क पर दिखे, यह देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है. आप खुद सोचें कि जिन कांग्रेसियों के लिए देश से बड़ा परिवार है वो घोटाले नहीं तो और क्या करेंगे.

इन दोनों प्रदर्शनों को हिंदुस्तान की जनता ने देखा और सुना, जनता खुद फैसला करे की आतंकी कौन है, देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत रखने वाले संघी या देश को चूल्हे में झोंक कर मैनो परिवार की चापलूसी करने वाले काँग्रेसी.

आज देश में क्रान्तिकारियों की कमी नहीं, जरूरत है उन्हें एक मंच पर लाने की, निश्चित ही एक दिन ऐसा आएगा जब देश की जनता डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल बहादुर शास्त्री जी, पं दीन दयाल उपाध्याय जैसे नेताओं की असमय मौत का रहस्य जानना चाहेगी और जब यह राज खुलेंगे तो देश में भूचाल आएगा और वो भूचाल देश को परम वैभव पर ले जाएगा, इसमे कोई शक नहीं.

3 comments:

निर्मला कपिला said...

बात सोनिया की नही है उस गन्दी राजनीति की है जो हिन्दुत्व के संस्कारों को ताक पर रख कर ऐसे नही तो वैसे सही की तर्ज़ पर घर की बहु बेटियों की इज्जत चौराहे पर निलाम करते हैं। किसी के अपने घर की बहु बेटी को क्या वो ऐसे सह सकेंगे? प्रश्न नारी का है। कैसी मर्दानगी है? उसे राजनीति से हराओ न कि व्यक्तित्व पर। क्या इस पार्टी मे सब दूध के धुले हैं? जरा नज़र डालें । आज इस पार्टी से मोह भँग हो गया है।

निर्झर'नीर said...

एक दिन ऐसा आएगा जब देश की जनता डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल बहादुर शास्त्री जी, पं दीन दयाल उपाध्याय जैसे नेताओं की असमय मौत का रहस्य जानना चाहेगी.....

aise netaoN ki aaj is bharat mata ko fir se jarurat hai .

vivek said...

The Indian media has lost its credibility. The big media houses are toeing the line of Sonia and Rahul is amazing. Though most of the congress workers have made millions in corruption yet media still regards madam Sonia and Rahul as saint. India needs overhauling.How congress men digest the most corrupt nation tag which India has been given recently.They never held accountable their boss Sonia, Rahul and Manmohan for the ills nation is facing. They have left all records of chamchagiri, chaplusi etc.They are protesting against Sangh to make numbers. If Sangh come in open then they will never think of protesting in their life. Congress is a blot on our society. Down with this present congress party who has brought all institutions of India to its lowest level. I am fully agree with your anger.