धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Monday, August 9, 2010

सोने की चिडिया की स्वाधीनता और काँग्रेसी लुटेरे

हम भारत के लोग बडे ही हर्षोल्लास से १५ अगस्त को स्वाधीनता दिवस मनाते हैं, लेकिन हममें से बहुत कम लोगों को यह भान होगा कि इससे एक दिन पूर्व यानि १४ अगस्त १९४७ को भारत माता के दो टुकडे कर दिये गये।  असंगठित हिन्दू समाज और उसका दूर-दृष्टिहीन नेतृत्व (गाँधी, नेहरु आदि ) जो अलगाववादियों के तुष्टिकरण व पुष्टिकरण में वर्षों से लगा था, उन्ही की भूलों ने हमें यह गहरा घाव दिया. बीस लाख लोग मारे गए. विभाजन के द्वारा भारत की साढ़े नौ लाख वर्ग किलोमीटर भूमि (कुल भूमि का २३%)  १९% लोगों को दे दी गयी. काँग्रेस नेत्रित्व ने अपना वोट बैंक बनाये रखने के लिए २.५ करोड़  अलगाववादियों को यहीं रोक लिया. ये वही लोग थे जिन्होंने १९४६ के चुनाव में विभाजन के पक्ष में मुस्लिम लीग को वोट दिया था. जरा सोचिये! जिन्होंने अपने लिए अलग देश माँगा था उनका शेष खंडित भारत में  रहने का क्या हक़ बनता था?.
अहिंसा के कथित पुजारी मोहन दास करम चंद गाँधी की गलत नीतियों के कारण लाखों लोग असमय काल के गाल में समां गए थे. गोरे और काले अंग्रेजों  ने उसी गाँधी को राष्ट्रपिता की पूजनीय उपाधि से विभूषित किया ताकि कोई उसके बारे में कुछ बोले नहीं. गाँधी की अहिंसा नीति का समर्थन करने की बात करने वाले विदेशी भारत से अहिंसा की अपेक्षा करते है और खुद जब चाहे जहाँ चाहे आक्रमण कर देते हैं.
अब वो समय आ गया है कि देश की युवा पीढ़ी गाँधी के बारे में उपलब्ध सरकारी साहित्य से अलग पढ़कर जानकारी हासिल करे और फिर किसी ठोस आधार पर गाँधी का मूल्याङ्कन करे. यह भी ध्रुव सत्य है कि आने वाली पीढ़ी इतिहास पुरुषो का फिर से मूल्याङ्कन करेगी. और खुद फैसला करेगी कि नेताजी सुभाष, सरदार भगत सिंह, आज़ाद, विस्मिल, असफाक उल्ला खान, लाला लाजपत राय, तिलक आदि देश के आदर्श होंगे या गाँधी नेहरु राजवंश.
अगर समाचार पत्रों और मीडिया आदि पर गौर करें तो सरकार एवं काँग्रेस पार्टी उस राजीव गाँधी का गुणगान करने में लगी दिखती है जिनका नाम १९८४ के सिख दंगे, बोफोर्स घोटाले, बीस हज़ार से ज्यादा मौतों के जिम्मेदार एंडरसन आदि को भगाने आदि विषयों पर आता है.
शास्त्री जी भी उसी काँग्रेस में थे लेकिन कोई उन्हें काँग्रेसी उन्हें अपना आदर्श बनाएगा ऐसा प्रतीत नहीं होता. काँग्रेस के किसी पोस्टर को उठा कर देखिये, उसमे नेहरु राजवंश ही दिखेगा, पटेल या शास्त्री जैसा नेता नहीं. काँग्रेस के पोस्टरों पर प्रियंका बढेरा भी खूब दिखती है लेकिन देश और काँग्रेस के लिए उनका योगदान आज तक नहीं दिखा. मीडिया में राहुल का ग्लैमर भी खूब बिकता है, लेकिन देश और समाज के लिए उनका योगदान सिर्फ नौटंकी से आगे नहीं दिखता. जिसमें कभी किसी दलित के यहाँ भोजन तो कभी खाली टोकरी और गद्देदार जूते पहनकर मेहनत करने का नाटक ही दिखता है. काँग्रेस पार्टी आज देश में भ्रष्टाचार और चाटुकारिता की पर्याय बन चुकी है.
देश की आजादी के इतने वर्षों के बाद भी देश के समस्त संसाधनों पर यही मुट्ठी भर लोग कुंडली मार कर बैठे हुए हैं और जनता के एक बड़े हिस्से को दो जून भरपेट रोटी भी नसीब नहीं. आम जनता मंहगाई से त्रस्त है, मिलावट का धंधा जोरों पर है. जिस देश में दूध दही की नदियाँ बहती थी वहाँ कोई भी वस्तु शुद्ध मिलने का भरोसा नहीं.
हमारा देश सोने की चिड़िया था, है और आगे भी रहेगा, लेकिन जरूरत है उसे लुटेरों से बचा कर रखने की.
देश को पहले मुस्लिम आक्रमणकारियों ने लूटा, फिर गोरे अंग्रेजों ने और अब काले अँगरेज़ और उनके चाटुकार लूट रहें हैं. राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन से सम्बंधित विभिन्न घोटाले इसका ताज़ा प्रमाण हैं कि सोने की चिड़िया के पंख किस कदर लूटे जा रहें हैं.
देश के इतिहास पर गौर करें तो ज्यादातर समस्यायें काँग्रेस की गलत नीतियों की देन है, देश के सामने विकराल रूप में खड़ी कश्मीर समस्या भी हमारे देश के अदूरदर्शी भाग्यविधाताओं की देन है.
आज भी देश में तुष्टिकरण की नीति बेधड़क चल रही है. हिन्दू हित की बात करना इस देश में साम्प्रदायिकता कहलाता है. एक चुने हुए जनता के प्रतिनिधि को देश के दूसरे हिस्से में जाने से रोकने का दबाव बनाया जाता है ताकि एक खास वोट बैंक नाराज़ ना हो जाये.
क्या वो समय अभी नहीं आया कि देश का बौद्धिक वर्ग सरकार की भ्रष्ट, चाटुकार, तुष्टिकरण और सीबीआई जैसे साधनों का दुरुपयोग आदि विषयों पर अपनी बात रखे और हर स्तर पर गलत नीतियों का विरोध करे, अगर ऐसा नहीं किया गया तो ये मुट्ठी भर भ्रष्ट लोग हम सबकी जीवन रेखा का आधार भारत रूपी सोने की चिड़िया के पंख तब तक निचोड़ते रहेंगे जब तक उसके प्राण पखेरू उड़ ना जाएँ.
इतना कुछ होने पर भी देश की जनता का बड़ा हिस्सा सो रहा है, याद रखें यह देश हमारा घर है, अपने घर की रक्षा करने कोई विदेशी नहीं आएगा. इसकी रक्षा हमें ही करने होगी. आप लोगों से अनुरोध है कि देश की समस्याओं पर चुप ना बैठे, उठें, खुद जागें और दूसरों को भी जगाएं. 

8 comments:

vivek said...

आपने राजीव गाँधी के उस बचकाना निर्णय का उल्लेख नहीं किया जिस निर्णय के द्वारा १००० से अधिक शांति सैनिको को लिट्टे ने मौत के घाट उतर दिया था और हम अपने सैनिको के शव पे केवल विलाप ही कर पाए थे. हम सारी समस्याओं का हल चाहते हैं. ६४ साल बहुत होता है. हमारी समस्याएँ बढती ही जा रही है. कांग्रेस संस्कृति ने केवल अर्थ और काम को ही बढ़ावा दिया है . इस पार्टी ने पुरे भारतवर्ष को एक अंधे कुआँ में धकेल दिया है जहाँ से निकलना अदम्य साहस और राष्ट्र भक्ति के द्वारा ही संभव है. बिना क्रांति के इस दलदल से मुक्ति नहीं मिल सकता.

Saurabh Garg said...

Pandey JI jo bhi aapne kaha hai wo bilkul sach hai. But ye bhi to hai ki aaj kal ke bacche to bas wohi jante hai jo unhe padhaya jata hai.
Unhe to bas gandhi nehru ke bare me hi pata hai unke liye to "Bhagat" aur "Rajguru" Sirf wo log the jo aajadi ki ladai me shahid ho gaye the. Unki najar me to Gandhi Aur Nehru pariwar ne hi Desh ko Azad karwaya hai...

Bahut acha laga ye sab sun kar, Main to chahta hu ki desh ka baccha baccha is Blog ko padhe aur sach ko Jane.

Hai HIND

Saurabh Garg said...

Pandey JI jo bhi aapne kaha hai wo bilkul sach hai. But ye bhi to hai ki aaj kal ke bacche to bas wohi jante hai jo unhe padhaya jata hai.
Unhe to bas gandhi nehru ke bare me hi pata hai unke liye to "Bhagat" aur "Rajguru" Sirf wo log the jo aajadi ki ladai me shahid ho gaye the. Unki najar me to Gandhi Aur Nehru pariwar ne hi Desh ko Azad karwaya hai...

Bahut acha laga ye sab sun kar, Main to chahta hu ki desh ka baccha baccha is Blog ko padhe aur sach ko Jane.

Jai HIND

nitin tyagi said...

good article

निर्झर'नीर said...

avdesh ji ...............अपने घर की रक्षा करने कोई विदेशी नहीं आएगा. इसकी रक्षा हमें ही करने होगी

or hum jaroor karenge

'उदय' said...

...सार्थक अभिव्यक्ति !!!

----- श्रेष्ठ भारत ----- said...

अगर गाँधी सच में अहिंसा का पुजारी होता तो उसके मंदिर मे एक ही महीने में १० लाख लोग नहीं मरते ! तुष्टिकरण की भयंकर बीमारी उसे भी थी ! पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने के लिये सरकार पर दबाव बनाने हेतु गाँधी अनशन पर बैठा था, अब तो कोंग्रेस को अनशन पर ही बैठने की जरुरत नहीं है, हिन्दू मुसलमानों के लिए ही तो कमा रहे है ! टेक्स चूका चूका कर, और कोंग्रेस लुटा रही है पाकिस्तान पर और कश्मीर पर, कभी बढ़ के नाम पर तो कभी कश्मीर में राहत के नाम पर...लूटो कमीनो देश को लूटो ......इनके बाप का क्या जाता है...एक दो कमेन्ट कर देंगे "sefron terror" वगेरह... मे इस १५ अगस्त के मनहूस दिन को कभी नहीं मनाता......जिस दिन मेरे देश के दो तुकडे हुए थे, हमारे पुरखो की जन्मभूमि थी हजारो सालो से, मुग़ल तो बाद में आकर मरे...

KRANT M.L.Verma said...

avdhesh ji is desh ka durbhagy hai ki satta aise logon ke hath aa gayi jinhone is ke liye koi purusharth karne ke bajay sirf chatukarita ki. america ki svadhinta ka itihas padhiye jo 1916me ram prasad bismil ne likha.america ka pahla rashtrpati george washington bana kyoki usne angrejon ke viruddh sashastr yuddh kiya tha. gandhi nehru ne kya kiya? bataiye.
krantmlverma.blogspot.com