धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Wednesday, August 4, 2010

देश की तस्वीर

देश की तस्वीर अब बदल रही है,
सभी कहते हैं कि दूरी सिमट रही है.
बड़ी बड़ी इमारतें कुछ कहानी कह रहीं हैं.
कुर्बानी की सारी दास्ताँ बयान कर रहीं है.

मिलकर सबको जोड़ने का तार,
विकसित हो बेतार हो गया है.
पडोसी से बात करने के लिए,
मोबाइल का आविष्कार हो गया है.

अस्पतालों में भीड़ बढ़ती जा रही है,
दवाओं से ज्यादा अब बीमारी आ रही हैं.
रोगी को बचाने की औषधि आ गयी है,
हंसते परिवार को मारने दुर्घटना छा गयी है.

कैसे हो गए हैं आज देश के कर्णधार,
अपने आप में खोये खोये से रहते हैं.
बगावत नहीं करते कभी समाज के लिए,
खुद के लिए समाज से बगावत करते हैं.

लोग कहते हैं भारत गाँवों में बसता है,
ग्रामीणों के दिल में प्रेम रमता है.
बदली तस्वीर देखने पहुंचा जो गाँव में,
दिल की तस्वीर बदलने का पता चलता है.

3 comments:

परमजीत सिँह बाली said...

समय बहुत परिवर्तनशील होता है ...सो सब बदल रहा है दिक्कत हमे इस लिए आ रही है क्योंकि हम उस के साथ चल नही पा रहे...

निर्झर'नीर said...

लोग कहते हैं भारत गाँवों में बसता है,
ग्रामीणों के दिल में प्रेम रमता है.
बदली तस्वीर देखने पहुंचा जो गाँव में,
दिल की तस्वीर बदलने का पता चलता है.


avdesh ji awaysome

Shah Nawaz said...

बेहतरीन!