धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Thursday, July 29, 2010

राष्ट्रमंडल खेलों का सच और काँग्रेस

आजकल राष्ट्रमंडल खेलों(CWG) के आयोजन की तैयारी मे पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। पानी भी बहुत कीमती है और उसे भी बर्बाद करने का हक हमें नही है,फ़िर देशवासियो की खून पसीने की कमाई की बरबाद करने का हक सरकार को कैसे मिला। काँग्रेस संगठन और सरकार के मन्त्री भी तैयारियो मे हुई देरी से बौखलाये हुए हैं,कोइ कुछ कहता है तो कोइ कुछ। अभी मणि शङ्कर अय्यर जी का बयान आया है कि CWG का आयोजन अगर असफ़ल होता है तो उन्हे बहुत खुशी होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि आयोजन के लिए रिश्वत भी दी गयी है। विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें। 

http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2010/07/100727_aiyar_cwg_skj.shtml

सरकार और संगठन में गुटबाजी इतने चरम पर है कि कुछ लोग बाकायदा इन्द्रदेव से प्रार्थना कर रहे होंगे की दिल्ली में जमकर वर्षा हो और CWG की सफलता उसी में धुल जाये। अय्यर जी का यह बयान कितना गैर जिम्मेदाराना प्रतीत होता है कि देश कि थू थू हो और अय्यर जी प्रसन्न हो। ऐसा बयान कोई कांग्रेसी ही दे सकता है। वैसे तो उन्होने देश मे खेलों की वास्तविक स्थिति का सच कहने की हिम्मत दिखाई है लेकिन अब ऐसा कहना चाहे वो कोई भी हो उचित नही है। अय्यर जी का बयान निम्नलिखित पङ्क्ति को सार्थक करता है।

का वर्षा जब कृषि सुखाने।

CWG मे कितना पैसा बहाया जायेगा यह आने वाले वक्त मे पता चलेगा लेकिन सिर्फ़ समय से कार्य पूरा न होने की वजह से ही इसका बजट बढ गया है इसमे कोई शक नही है। जब मीडिया मे सरकार की खिचाई शुरु की तो आनन फ़ानन मे जवाहर लाल नेहरू क्रीडा स्थल का उद्घाटन कर दिया गया। इस आयोजन से देश को कितना फ़ायदा मिलेगा यह पता नही लेकिन सरकार के विभिन्न अंगों के द्वारा मीडिया मे प्रचारित खबरो से पता चलता है कि आयोजन में कोई ३५-४० हजार करोड रुपये तो लगेंगे ही। महगाई के बोझ तले दबी जनता त्राहिमाम कर रही है और सरकार तमाशे मे पैसा बहा रही है। हम सभी बचपन से ही एक कहावत सुनते आ रहे हैं कि

घर मे नही दाने अम्मा चली भुनाने।

सरकार इसी कहावत को चरितार्थ कर रही है। सभी लोग कहते हैं कि CWG के बहाने ही सही दिल्ली का विकास तो हो रहा है। मैं कहता हूँ कि विकास दिल्ली का ही नही देश के हर एक गाँव का होना चाहिये लेकिन सुनियोजित विकास और जल्दी बाज़ी के विकास मे बडा फ़र्क होता है और इस विकास के परिणाम स्वरुप पिछले कुछ वर्षो से दिल्ली वाले नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।

यह सब देखने के बाद भी समाज क्या करे आखिर वो उसकी ही चुनी हुई सरकार है,कभी कभी लगता है कि वैचारिक क्रान्ति का दौर प्रारम्भ हो गया है और विभिन्न उपलब्ध साधनों के द्वारा लोग सरकार का विरोध शुरु कर चुके है, लेकिन एकदम से कुछ नही बदलेगा क्योंकि इस पुण्यभूमि की सबसे बडी विडम्बना ही यही है कि हमारे योग्य प्रधानमंत्री जी का आदर्श मानस की निम्नलिखित चौपाई है।

सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरम यहु नाथ हमारा।।

अब हमारे प्रधानमंत्री जी का या कहें कि देश का नाथ कौन है यह हम सभी जानते हैं.

1 comment:

कविता रावत said...

yatharthprak aalekh....
Bahut saarthak aur sarahniya prayas..
Haardik shubhkamnayne