धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Monday, July 26, 2010

परिवारवाद और रिश्ते नातों के विलुप्त होने का आभास

आज के युग में विदेशों में पारिवारिक रिश्तों खासकर वैवाहिक रिश्तों में अलगाववाद के कारण लोगों का आकर्षण हिन्दुस्तानी परिवारवाद की ओर बढ़ रहा है। यह हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात हो सकती है कि देर से ही सही दुनिया ने परिवारवाद के महत्त्व को समझा है। लेकिन हम भारतीय आज रिश्तों नातों और भाईचारे की महत्वता को नकार रहें हैं. छोटा परिवार सुखी परिवार का नारा भले ही भौतिकतावादी युग में भला लगता हो लेकिन भारतीय संस्कृति पर सबसे बड़ा खतरा यही लेकर आया है ऐसा जान पड़ता है.


आज भारतवर्ष में एक खास वर्ग की जनसख्या का बहुत ही तीव्र गति बढ़ रही है. प्राकृतिक तरीके से तो बच्चे पैदा करने में ज्यादा समय लगता देखा तो पडोसी देशों से तैयार माल घुसपैठियों के रूप में अपने देश में प्रविष्ट करा उन्हें भारत का नागरिक बना दिया, यह सर्वविदित हैं की करोड़ों घुसपैठिये देश में रह रहें हैं जो बाकायदा देश के नागरिक हो चुके हैं. ऊपर से हमारे प्रधानमंत्री जी कहते घूमते हैं कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ उनका है. मतलब टैक्स हम दें और संसाधनों पर अधिकार बाहर से आये हुए घुसपैठियों का हो. इसे बड़ी विडम्बना हमारे समाज के लिए क्या हो सकती है?.
जनसख्या वृद्धि के लिए लव जिहाद का प्रयोग आज आम बात हो चुकी है और हिन्दू लड़कियां आसानी से जाल में फंस कर धर्म परिवर्तन कर रहीं हैं. माननीय उच्च न्यायालय भी इस विषय पर चिंता जता चुका है. यह लिंक देखें।


http://www.dnaindia.com/india/report_kerala-high-court-finds-signs-of-love-jihad-suggests-law-checks-it_1321955



सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि हम भौतिकतावाद के जाल में उलझ कर निरंतर अपने बच्चों कि संख्या में कमी करते जा रहें हैं. हम दो हमारे दो का नारा अब पुराना पड़ गया है और अब एक बच्चा संस्कृति का जमाना आ गया है. भारतवर्ष में लोकतंत्र है मतलब जिसके वोट ज्यादा उसी का राज. क्या यह चिंतन का विषय नहीं है कि वोट किसके ज्यादा होने जा रहें हैं?. एक बच्चा संस्कृति का पालन करने से हम तो कमजोर होंगे ही, बच्चे में भी सामाजिक सुरक्षा का अभाव होगा. एक बच्चे को हम पुलिस या अन्य सेवा में भेजेंगे यह बहुत मुश्किल जान पड़ता है, अर्ध सैनिक बल और सेना तो दूर की बात है. फिर पुलिस और सेना किसकी होगी यह भी चिंता का विषय है. देश व समाज की सुरक्षा से इतर परिवारवाद पर एक बच्चा संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ने वाला है यह भी चिंतन का विषय है?. जब सबके एक ही बच्चा होगा तो भाई-बहन, साला-साली आदि का रिश्ता बिलुप्त हो जायेगा इसमें कोई शक नहीं है. जब भाई-बहन, साला-साली ही नहीं रहेंगे तो अगली पीढ़ी में मामा-मामी, मौसी-मौसा, बुआ-फूफा, चाची-चाचा, ताई-ताऊ आदि रहेंगे क्या?.


इस पुरातन भारतीय संस्कृति का क्या होने वाला है इसका आभास अभी से होने लगा है, अगर समय रहते नहीं चेते तो परिणाम भी आज की युवा पीढ़ी के जीवन काल में ही दिखने लगेगा, इसमें भी मुझे कोई शक नहीं.


देश व हिन्दू समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता करने वाले लोग बहुत से हैं और उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र व समाज को समर्पित कर दिया है लेकिन अपने समाज की मनोदशा देखकर गोस्वामी तुलसीदास जी की निम्नलिखित पक्तियां स्वतः याद आ जाती हैं।



फूलहिं फलहिं न बेंत, जद्यपि सुधा बरसहिं जलधि............

5 comments:

सुज्ञ said...

सुन्दर विचार,
संस्कृति रक्षा का अभिनव दृष्टिकोण ।

VK Safety said...

Bahut he achha drishtikone hai........doorgami soach apnane ke liye prerit karne wal vichar hai.

vivek said...

आपने एक सामियिक विषय को उठाया है | यह न केवल प्रासंगिक है बल्कि झकझोरने वाला है | आखिर हिन्दू किस दिशा की ओर अग्रसर है| केवल स्वार्थ -मैं , मेरी पत्नी, और एक बच्चा |उन्हें राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेवारी को समझना होगा | हिन्दुओ पर आने वाली हर विपत्ति को समझना और सोचना होगा | मौज मस्ती के लिए एक बच्चा पैदा करना यह गैरजिम्मेदाराना है | अगर आपकी आय सही है तो २ से अधिक बच्चे होने चाहिए ताकि वह परिवार, समाज और राष्ट्र के काम आ सके| देश को लाल बाबुओं की नहीं जरूरत है| यह देश पराक्रमी और पुरुषार्थी युवाओं की बाट देख रहा है| वैसे हिन्दू पुरुष और महिला जो स्वार्थ वस् इस तरह का कार्य करते हैं उनका सामाजिक बहिस्कार होना चाहिए| अगर हिन्दू इस देश मैं अल्पसंख्यक होगा तो यह देश सेकुलर भी नहीं रहेगा | यह हमारा अनुभव बताता है |अतः जागो हिन्दू जागो

Dr. Anil Kumar Tyagi said...

भारतीय कुटुम्ब संस्था सबसे मजबूत व्यवस्था मानी जाती थी जिसका किसी भी विदेशी शक्ति ने न तो कुछ बिगाडा है न ही इस पर हमला कर सकी। अपनी इस व्यवस्था को सिर्फ अपने लोगों ने ही छिन्न-भिन्न किया है। जिसका दुश्परिणाम हम सब साहमुहिक रुप से झेल रहे हैं।

honesty project democracy said...

इसका एक ही समाधान है की हर भारतीय नागरिकों के लिए जनसँख्या नियंत्रण कानून एक सामान हो और दो बच्चे से ज्यादा पैदा करने वालों से सख्ती से निपटा जाय चाहे वह हिन्दू हो ,मुसलमान हो या और कोई........जनसंख्या का बेतहासा बढ़ना भी पूरी मानवता के लिए खतरनाक है.......