धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Friday, July 23, 2010

सर्वोच्च बलिदान के लिए शहीद शब्द का प्रयोग कितना उचित

देश के लिए आज तक अनगिनत लोगों ने हंसते हंसते अपने प्राण न्योछावर किये हैं और उन वीर सपूतों को सम्मान देने के लिए हम सबके मन में जो शब्द आता है वह है "शहीद"। यह शब्द ही अपने आप में पूर्ण प्रतीत होता है। मानसिक चिंतन करते हुए मन में यह आकांक्षा जगी कि क्यों इस शब्द के मायने तलाशे जाएँ, यह कहाँ से आया, हमने उसे कैसे अपनाया आदि आदि.

इन्टरनेट कि दुनिया ने काफी कार्य आसान कर दिए हैंगूगल पर Shahid टाइप करके खोजा तो विकिपीडिया का यह लिंक मिला जिसने अंतर्मन को हिला दिया। आप भी देखें कि सर्वोच्च बलिदान के लिए यह शब्द हमें प्रयोग करना चाहिए या नहीं? यह ठीक है कि यह शब्द आज हिंदी शब्दकोष का एक अनिवार्य अंग है लेकिन उसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई और शब्द का वास्तव में किन अर्थों में प्रयोग किया जाता था यह भी ध्यान में रखना जरूरी है

यह लिंक देखें. http://en.wikipedia.org/wiki/Shahid


Shahid (Arabic: شَهيد ‎ šahīd, plural: شُهَداء šuhadā', also romanized as shaheed) is an Arabic word meaning "witness". It is a religious term in Islam, literally meaning "witness", but practically means a "martyr." It is used as a honorific for Muslims who have laid down their life fulfilling a religious commandment, or have died fighting in Jihad।


मतलब साफ़ है कि शहीद शब्द का प्रयोग उन मुस्लिमों का सम्मान करने के लिए किया जाता था जिन्होंने इस्लाम के जिए जिहाद कर अपने प्राण गवाएं थे.

अगर हम शहीद शब्द का वास्तविक अरबी अर्थ निकालें तो देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत अपने आप को शहीद कहलाना पसंद करेंगे इसमे मुझे संदेह है.

यह मेरे अपने विचार हैं, शहीदों का अपमान करना, चाहे वह इस्लाम के लिए ही क्यों हुए हो, मेरा मकसद नहीं हैशहीद शब्द जितना अरबी है उससे ज्यादा हिन्दुस्तानी है और हम हिन्दुस्तानी इसका मतलब अपने हिसाब से जानते हैं


कारगिल में सर्वोच्च बलिदान करने वालें वीर सपूतों को समर्पित

सादर वन्दे.

2 comments:

vivek said...

आपने सही लिखा है| सही शब्दों का उपयोग हमारे आचरण में नहीं है | परिपाटी बदलनी होगी | केवल अन्धा अनुकरण से कम नहीं चलेगा | हमारे मीडिया वाले ज्यादातर शहीद शब्द का प्रयोग करते हैं | अपने अच्छी शुरुआत की है|

Suresh Chiplunkar said...

विचारणीय बात कही है आपने… इस पर कभी ध्यान नहीं दिया था…
आपका आभार।