धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Friday, July 2, 2010

हम तो हुए हैं काफ़िर, वो मुसलमान हो गए हैं.

अपने ही देश में सब, अनजान हो गए हैं,
हम तो हुए हैं काफ़िर, वो मुसलमान हो गए हैं,
जाति और धर्म की, इतनी चली है चर्चा,
कोई बना है बामन, कुछ पठान हो गए हैं.

कोई मिला पंजाबी,  फिर मिल गया बिहारी,
एक जो दिखा था कन्नड़, अगला था राजस्थानी,
कश्मीर से शरू कर , केरल तक  मैंने ढूंढा,
कोई मिला ना ऐसा, जो होवे हिन्दुस्तानी.

आज़ादी मिली कैसी, भूखे हम सो रहे हैं,
गोरे चले गए पर, गद्दार रह रहे हैं,
लुटा है देश जिसने, अब राज कर रहे हैं,
सड़कें हो या नगर सब, किस नाम बन रहें हैं.

कब याद हम करेंगे, जो महा पुरुष बिसारे,
अशफाक हो या विस्मिल, थे प्रेरणा हमारे,
नयी पीढ़ियों को, आदर्श किसका देंगे,
जब भक्त नहीं द्रोही, हैं बन गए सितारे.

तुम भाग्य के भरोसे, जब तक रहोगे सोते,
सच मानो मेरे प्यारे, मौका रहोगे खोते,
उखाड़ फेंको जल्दी, गद्दारों को देश से तुम,
पूजा करो करम की, कब तक रहोगे रोते.

5 comments:

Etips-Blog Team said...

आपकी पीँङा वाजिब है । इस लेख के लिऐ आपका आभार

सुप्रसिद्ध साहित्यकार और ब्लागर गिरीश पंकज जी के साथ एक मुलाकात,उनका इंटरव्यू पढने के लिए यहा क्लिक करेँ >>>
एक बार अवश्य पढेँ

VK Safety said...

Mere bhai.........aapne to aaj ke taji tasweer utar dee hai...parantu yah to tab tak chalta rahega jab tak bharat varsh ka ek ek byakti jagroop na hoga..aapke prayas sarahneey hai......lage rahe. mera manana hai kee subah jaroor hogi.

निर्झर'नीर said...

कब याद हम करेंगे, जो महा पुरुष बिसारे,
अशफाक हो या विस्मिल, थे प्रेरणा हमारे,
नयी पीढ़ियों को, आदर्श किसका देंगे,
जब भक्त नहीं द्रोही, हैं बन गए सितारे.

bahut khoob bhaiya ji

ANKIT said...

Sachai likhi hain .. Bahut Khoob

ANKIT said...

sachhai likhi hain .. Bahut Khoob !!

Ankit