धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Sunday, May 23, 2010

ब्लॉग जगत में भी धर्म एक बिकाऊ माल है

ब्लॉग जगत में बहुत सारे लोग हैं, भीड़ से अलग दिखने वाले और भीड़ में शामिल, बहुत सारे धर्मनिरपेक्ष ब्लोगर भी हैं तो कुछ ऐसे  भी हैं जो अपने धर्म की अच्छाईयाँ और अन्य धर्मों की बुराइयाँ निकालने में बहुत आगे रहते हैं. धर्म के पक्ष में बोलने वाले लोग तो हैं ही अपने आप को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले लोग भी धर्म से ऊपर नहीं उठ पाते हैं. दिखावे के लिए उनकी कुछ अन्य पोस्ट भी आती रहती हैं.
हाँ कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने लगातार प्रयास करते हुए अपने आप को स्थापित किया है.
लेकिन विश्लेषण करने से पता चलता है की सिर्फ राजनीति में ही नहीं ब्लॉग जगत में भी धर्म एक बिकाऊ माल है.
हिट होने का शक्ति वर्धक फार्मूला......

7 comments:

Suman said...

nice

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सच है! यहाँ भी धर्म बिकता है...

Sumit Khanna said...

bilku sahi Kaha. kuchh log to har samay isi me lage rehte hai

निर्झर'नीर said...

हिट होने का शक्ति वर्धक फार्मूला....


bhai itni jaldi nash pakaD li aapne or sath hi sath aaina latka ke bhi ghoom rahe ho ..

javab nahi aapki saafgoii kaa

'उदय' said...

...बहुत खूब !!!

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

क्या कहा जाय .. अरे इन दोउन राह न पाई ...

फ़िरदौस ख़ान said...

धर्म का प्रचार...?