धर्मो रक्षति रक्षितः
रक्षित किया हुआ धर्म मनुष्य की रक्षा करता है।
:- मनुस्मृति


जब सनातन धर्म का क्षरण होता है, तब राष्ट्र का क्षरण होता है। :- महर्षि अरविन्द

बहवो यत्र नेतार:, सर्वे पण्डित मानिना:। सर्वे मह्त्व मिच्छंति, तद् राष्ट्र भव सीदति ।।

जिस राष्ट्र में नेतृ्त्व करने वाले बहुत हो जाते हैं एवं अपने को बुद्धिमान समझते हैं तथा प्रत्येक श्रेष्ठ पद की आकांक्षा रखता है, वह राष्ट्र नष्ट हो जाता है.

Saturday, May 15, 2010

गरीब की जाति

जनगणना करने आया अधिकारी मेरे गाँव में,
बैठ गया वो मंदिर पर पीपल की छाँव में,
बोला ग्रामवासियों से अपनी जाति मुझे बताओ,
मौका है प्रिय बन्धु आज फिर से इसे भुनाओ.

उठा एक व्यक्ति बोला, पूरी बात मुझे समझाओ,
गरीब की कोई जाति हो तो उसको मुझे बताओ.
कब तक हमको ऐसा  भेद भाव सिखाओगे,
कितने वर्षों के बाद हमें हिन्दुस्तानी बनाओगे.

अधिकारी बोला भैया मेरे फरमान ऊपर से लाया हूँ,
बोया है जो बीज तुमने फल उसका देने  आया हूँ.
जब तक जाति के नाम पर तुम वोट देते रहोगे,
हिन्दुस्तानी बनने के लिए वर्षों तरसते रहोगे.

3 comments:

honesty project democracy said...

नेताओं की इतनी बेशर्मी मैंने भी ,अपने जीवन में कभी नहीं देखि / विचारणीय प्रस्तुती /

कविता रावत said...

अधिकारी बोला भैया मेरे फरमान ऊपर से लाया हूँ,
बोया है जो बीज तुमने फल उसका देने आया हूँ.
जब तक जाति के नाम पर तुम वोट देते रहोगे,
हिन्दुस्तानी बनने के लिए वर्षों तरसते रहोगे.
...saarthak prasuti aur jwalnt sawal... yahi to bidambana hai hamare samaj ki... rajneeti bhent chad raha ha jaativaad.....

निर्झर'नीर said...

अवधेश जी ...मुददा फिर वही और और जनता फिर उन्ही को भेज देगी संसद में ................आपकी कविता में सार्थक व्यंग है